नई दिल्ली: अमेरिकी बलों ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाला तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ जब्त कर लिया, जिसे पहले ‘बेला 1’ नाम से जाना जाता था. इसे वेनेज़ुएला से जुड़े तेल कारोबार से जोड़कर देखा जा रहा है और अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में यह कार्रवाई की गई. इस जहाज के 28 क्रू में तीन भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. रूस ने इस कार्रवाई की निंदा की है और चालक दल के साथ मानवीय व्यवहार की मांग की है.
अमेरिका ने ‘मरीनेरा’ को तब जब्त किया जब यह नॉर्थ अटलांटिक में आइसलैंड और यूके के बीच से गुजर रहा था. अमेरिकी तटरक्षक बल और नौसेना ने इसे कई हफ्तों तक ट्रैक किया था और एक फेडरल कोर्ट वॉरंट के तहत यह कार्रवाई की गई. जहाज पर किसी भी प्रतिरोध के बिना नियंत्रण स्थापित किया गया.
मरीनेरा के कुल 28 सदस्यों में तीन भारतीय नागरिक थे. शेष दल में 17 यूक्रेनी, 6 जॉर्जियाई और 2 रूसी (जिसमें कप्तान भी शामिल है) थे. रूस ने वाशिंगटन से अनुरोध किया है कि सभी विदेशी नागरिकों का सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और जल्द से जल्द उनके घर लौटने की अनुमति दी जाए.
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि ‘मरीनेरा’ को अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन के संदेह में जब्त किया गया है. यह जहाज पहले भी ‘बेला 1’ नाम से पनामा के झंडे के नीचे दौड़ा था और बाद में रूस के झंडे के तहत पंजीकृत किया गया. अमेरिका का दावा है कि यह जहाज वेनेज़ुएला से तेल ले जा रहा था, जो प्रतिबंधों के दायरे में आता है.
रूस ने इस कार्रवाई की भर्त्सना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री नियमों का उल्लंघन किया गया है. रूस के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, ‘मरीनेरा’ को वैध रूप से रूसी जहाज के रूप में पंजीकृत किया गया था और किसी भी राज्य को ऐसे जहाजों पर बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है. रूस ने चालक दल के सम्मानजनक व्यवहार और जल्द वापसी की मांग की है.
यह घटना अमेरिका और रूस के बीच पहले से ही बिगड़े संबंधों में और तनाव जोड़ सकती है. वैश्विक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला समुद्री कानून, अंतरराष्ट्रीय संधियों और ऊर्जा राजनीति से जुड़ा हुआ है. अमेरिका और उसके सहयोगी तेल प्रतिबंधों को लागू करने के लिए प्रयासरत हैं, जबकि रूस इसे कानून का उल्लंघन बता रहा है, जिससे भविष्य में कूटनीतिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं.