नई दिल्ली: वेनेजुएला और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर तीखा मोड़ आ गया है. देश की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अमेरिका की नीतियों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि मादक पदार्थ तस्करी, लोकतंत्र और मानवाधिकारों जैसे आरोप सिर्फ बहाने हैं. असल वजह वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार हैं. उनके इस बयान ने न केवल वाशिंगटन में हलचल बढ़ाई है, बल्कि रूस और चीन जैसे देशों के लिए भी नए संकेत दिए हैं.
डेल्सी रोड्रिगेज ने वेनेजुएला की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका लंबे समय से उनके देश पर तरह-तरह के आरोप लगाता आया है. ड्रग तस्करी, लोकतंत्र के कमजोर होने और मानवाधिकार उल्लंघन जैसे मुद्दों को उठाकर दबाव बनाया गया, लेकिन इन सबके पीछे असली मकसद तेल है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं और यही वजह है कि 'उत्तरी देशों की ऊर्जा लालच' लगातार इस देश पर मंडराती रही है.
रोड्रिगेज का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को पूरा सहयोग दे रही है और आने वाले वर्षों तक देश तथा उसके तेल संसाधनों पर वाशिंगटन का प्रभाव बना रहेगा. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रोड्रिगेज ने कहा कि ऐसे दावे सच्चाई से दूर हैं और वेनेजुएला कभी भी अपने संसाधनों पर बाहरी नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा.
अंतरिम राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि वेनेजुएला किसी एक देश के दबाव में फैसले नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार उन सभी देशों के साथ ऊर्जा साझेदारी के लिए तैयार है, जहां सहयोग पारदर्शी हो और सभी पक्षों को लाभ मिले. इस संदर्भ में रूस और चीन का नाम लिए बिना उन्होंने संकेत दिया कि वेनेजुएला अपने ऊर्जा संबंधों में विविधता चाहता है और विकल्प खुले रखेगा.
रोड्रिगेज ने कहा कि वेनेजुएला एक ऊर्जा महाशक्ति है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत के साथ-साथ समस्या भी रही है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से देश को राजनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय विवादों का सामना करना पड़ा. उनके मुताबिक, झूठे आरोपों का मकसद हमेशा यही रहा कि किसी न किसी तरह वेनेजुएला के तेल को बाहरी ताकतों के हवाले कर दिया जाए.
अपने संबोधन में रोड्रिगेज ने यह भी कहा कि वेनेजुएला अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर वाणिज्यिक समझौतों के लिए तैयार है. उन्होंने दोहराया कि ऊर्जा सहयोग तभी संभव है जब शर्तें स्पष्ट हों और राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान किया जाए. उनका यह बयान वैश्विक राजनीति में यह संदेश देता है कि वेनेजुएला अब एकतरफा दबाव के बजाय बहुपक्षीय सहयोग की राह पर आगे बढ़ना चाहता है.