नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब समुद्री क्षेत्र में नई दिशा ले चुका है. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों को घेरकर उसके व्यापार को रोकने की कोशिश तेज कर दी है. इसके जवाब में ईरान ने तकनीकी चालें चलनी शुरू कर दी हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी जहाज अब अपनी असली पहचान छिपाकर समुद्र में आवाजाही कर रहे हैं. यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए भी चिंता का कारण बनती जा रही है.
अमेरिका ने हाल ही में ईरान के समुद्री व्यापार पर सीधा प्रहार करते हुए उसके प्रमुख बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी है. अमेरिकी सेना का कहना है कि इस कदम से ईरान के आयात-निर्यात पर गहरा असर पड़ा है. चूंकि ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक समुद्री व्यापार पर निर्भर है, इसलिए यह नाकाबंदी उसे आर्थिक रूप से कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.
इस दबाव का सामना करने के लिए ईरान ने स्पूफिंग तकनीक का सहारा लिया है. इसके तहत जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं या गलत जानकारी प्रसारित करते हैं. इससे उनकी लोकेशन और पहचान छिप जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तरीका जहाजों को ट्रैकिंग सिस्टम से बचाने में मदद कर रहा है और नाकाबंदी के बावजूद उनकी आवाजाही जारी है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान ने यह तरीका रूस से सीखा है. रूस लंबे समय से प्रतिबंधों से बचने के लिए इसी तरह की तकनीकों का इस्तेमाल करता रहा है. अब ईरान भी उसी रणनीति को अपनाकर अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहा है. इससे समुद्री निगरानी और ज्यादा जटिल हो गई है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के लिए चुनौती बढ़ गई है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि नाकाबंदी पूरी तरह लागू है. इस अभियान में 10,000 से ज्यादा सैन्य कर्मी शामिल हैं. कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि 36 घंटे के भीतर ईरान के समुद्री व्यापार को काफी हद तक रोक दिया गया है. कई जहाजों को बीच समुद्र से वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया है.
होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग में इस तरह की गतिविधियां वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का कारण बन रही हैं. जहाजों की पहचान छिपने से निगरानी कठिन हो रही है और व्यापारिक जोखिम बढ़ रहा है. यदि यह टकराव लंबा खिंचता है, तो इसका असर तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर साफ दिखाई दे सकता है.