नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक जटिल मोड़ पर पहुंच गया है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है. युद्धविराम की समय सीमा करीब है, लेकिन बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. हालात ऐसे हैं कि शांति की उम्मीद और संघर्ष की आशंका दोनों साथ-साथ चल रही हैं.
अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत कर दिया है. करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की जा रही है. इनमें से 6,000 सैनिक एयरक्राफ्ट कैरियर USS George H.W. Bush पर मौजूद हैं. इसके अलावा 4,200 सैनिक जल्द ही क्षेत्र में पहुंचने वाले हैं. पहले से मौजूद 50,000 सैनिकों के साथ यह तैनाती अमेरिका की रणनीतिक तैयारी को दिखाती है.
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए समुद्री नाकाबंदी भी तेज कर दी है. खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोत कई जहाजों को रोककर वापस भेज चुके हैं. इसका मुख्य उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को रोकना है. इस कदम का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है, जहां तेल की कीमतें फिर से बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में दुनिया कुछ बड़ा देख सकती है. उनका मानना है कि यदि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका गया, तो ईंधन की कीमतें भी तेजी से गिरेंगी. हालांकि उनके इस भरोसे के साथ जमीन पर तैयारियां कुछ और ही संकेत दे रही हैं.
ईरान ने अमेरिका की नाकाबंदी के जवाब में सख्त रुख अपनाया है. ईरानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर दबाव जारी रहा, तो वे फारस की खाड़ी, ओमान सागर और लाल सागर में व्यापारिक रास्तों को बंद कर सकते हैं. इस बयान से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और वैश्विक व्यापार पर खतरा मंडरा रहा है.
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है. युद्धविराम की समय सीमा नजदीक है और इसे बढ़ाने पर भी सहमति नहीं बनी है. दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहने के बावजूद स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है. आने वाले दिन तय करेंगे कि यह तनाव खत्म होगा या और गहराएगा.