नई दिल्ली: दुनियाभर के व्यापार और अर्थव्यवस्था में कब कौन सी हलचल भारत की जेब पर भारी पड़ जाए कहना मुश्किल है. कुछ ऐसा ही अलर्ट इस बार देश के वित्त मंत्रालय की तरफ से आया है. वित्त मंत्रालय ने आगाह किया है कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य यानी कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में लंबे समय तक तनाव या रुकावट बनी रही तो यह भारत की बाहरी अर्थव्यवस्था और महंगाई के मोर्चे पर सबसे बड़ा खतरा बन सकता है. मई 2026 की अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में मंत्रालय ने कहा है कि इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में लगातार आ रही दिक्कतों से देश में कीमतें बढ़ सकती हैं और आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी हो सकती है.
आर्थिक मामलों के विभाग DEA द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल कम समय के लिए भारत की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत स्थिति में है. घरेलू मांग में स्थिरता, सर्विसेज एक्सपोर्ट में मजबूती, रोजगार के अच्छे अवसर और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश की आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रहे हैं. लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक माहौल काफी अनस्टेबल और टेंश हो गया है.
समीक्षा के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावटें कब तक जारी रहती हैं. यह समुद्री रास्ता पूरी दुनिया में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई के लिए सबसे खास रूट माना जाता है. अगर यहां हालात जल्द सामान्य हो जाते हैं तो भारत अपने निर्यात और निवेश के दम पर तेजी से आगे बढ़ता रहेगा.
वित्त मंत्रालय ने महंगाई को लेकर भी चिंता जताई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय थोक मूल्य सूचकांक खुदरा महंगाई के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा है जिसका सीधा मतलब है कि कंपनियों की लागत और माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है. हालांकि यह बढ़ी हुई लागत अभी पूरी तरह आम जनता तक नहीं पहुंची है लेकिन आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई बढ़ने की पूरी आशंका है.
इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और कमजोर मानसून के अनुमान से भी खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं. चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है इसलिए इस जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने रणनीतिक कच्चे तेल के भंडारण के लिए कदम उठाए हैं. मंत्रालय ने जोर दिया है कि नीति निर्माताओं को इन वैश्विक खतरों से निपटने के लिए अपनी नीतियों में लचीलापन रखना होगा.