नई दिल्ली: मध्य पूर्व में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे काले होने लगे हैं. पूर्व CIA अधिकारी जॉन किरियाकू ने रविवार को जूलियन डोरी पॉडकास्ट में एक ऐसा दावा किया है जिसने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है. किरियाकू के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के खिलाफ हमला करने का अंतिम निर्णय ले लिया है. उन्होंने व्हाइट हाउस के एक पूर्व खुफिया साथी के हवाले से कहा कि यह सैन्य कार्रवाई सोमवार या मंगलवार को किसी भी समय शुरू हो सकती है.
यह घटनाक्रम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुक्रवार को तेहरान को दिए गए उस 10-दिवसीय अल्टीमेटम के बाद आया है, जिसमें ईरान को अपना परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम छोड़ने की धमकी दी गई थी. किरियाकू का आरोप है कि यह समय-सीमा केवल विरोधियों को मानसिक रूप से अस्थिर करने की एक चाल है. उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिकी प्रशासन पहले भी ऐसी डेडलाइन देकर समय से काफी पहले प्रहार कर चुका है.
इस दावे के बीच खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अत्यंत तेज हो गई हैं. 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के अल उदीद एयर बेस से सैकड़ों सैनिकों को अत्यंत गोपनीय तरीके से स्थानांतरित किया जा रहा है. बहरीन, इराक, सीरिया, कुवैत और यूएई जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी संदिग्ध हलचल देखी गई है. क्षेत्र में तैनात 30 से 40 हजार अमेरिकी सैनिकों पर ईरानी जवाबी कार्रवाई का तत्काल और गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
ईरान ने भी इस स्थिति को चुपचाप स्वीकार (Admit) करने के बजाय कड़ा रुख अपनाया है. संयुक्त राष्ट्र को लिखे एक पत्र में तेहरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी आक्रामकता की स्थिति में क्षेत्र के सभी अमेरिकी ठिकाने और संपत्तियां वैध सैन्य लक्ष्य होंगी. इस खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अतिरिक्त 'पैट्रियट' और हाई-एल्टीट्यूड डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं, जबकि अपने एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक समूहों को ईरानी एंटी-शिप मिसाइलों की पहुंच से दूर रखा है.
किरियाकू ने खुलासा किया कि व्हाइट हाउस के भीतर इस मुद्दे पर दो गुटों में गहरी वैचारिक लड़ाई चल रही है. जहाँ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और तुलसी गबार्ड 'युद्ध विरोधी' पक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सैन्य हस्तक्षेप के पक्ष में हैं. पूर्व अधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि हाल ही में यूएफओ (UFO) फाइल्स को सार्वजनिक करने की घोषणा केवल जनता का ध्यान युद्ध से भटकाने के लिए की गई एक संदिग्ध कोशिश हो सकती है. हालांकि व्हाइट हाउस आधिकारिक तौर पर परमाणु डील की बात कर रहा है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ट्रंप अब 'रेजीम चेंज' जैसे स्थायी समाधान की संभावना भी तौल रहे हैं.