अमेरिकी खुफिया समुदाय की ताजा रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है. इस रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है. हालांकि दोनों देश सीधे टकराव से बचना चाहते हैं, लेकिन आतंकवादी गतिविधियां हालात को भड़का सकती हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालिया तनाव कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन जोखिम अभी भी बना हुआ है.
अमेरिकी सीनेट में पेश इस वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों की संवेदनशीलता के कारण परमाणु संघर्ष का खतरा लगातार बना रहता है. दोनों देशों के बीच पहले भी कई बार टकराव हो चुके हैं, जिससे हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों देश खुले युद्ध से बचना चाहते हैं, लेकिन हालात कभी भी नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं.
रिपोर्ट में खासतौर पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को तनाव बढ़ाने वाला मुख्य कारण बताया गया है. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले का उदाहरण देते हुए कहा गया कि ऐसे हमले दोनों देशों के बीच टकराव को भड़का सकते हैं. इस हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई ने हालात को और संवेदनशील बना दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक आतंकवादी तत्व ऐसे माहौल का फायदा उठाकर संकट को और गहरा कर सकते हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालिया तनाव को कम करने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का जिक्र किया गया है. हालांकि भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि संघर्ष के बाद सीजफायर का फैसला दोनों देशों के बीच बातचीत से हुआ था. रिपोर्ट का आकलन है कि फिलहाल कोई भी देश बड़े युद्ध की ओर नहीं बढ़ना चाहता, लेकिन हालात नाजुक बने हुए हैं.
अमेरिकी खुफिया प्रमुख ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के पास ऐसी लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित हो रही हैं, जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं. इसके साथ ही रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देश भी अपने हथियारों को लगातार आधुनिक बना रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन खतरों को देखते हुए वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है और सतर्कता बेहद जरूरी है.