नई दिल्ली: अमेरिका ने इतिहास में पहली बार एक बड़ी परंपरा बदलने का फैसला किया है. अमेरिकी ट्रेजरी ने पुष्टि की है कि अब मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर डॉलर के नोटों पर छपेंगे. यह परिवर्तन देश की 250वीं वर्षगांठ के उत्सव का हिस्सा है और इसे राष्ट्रपति के नेतृत्व का प्रतीक माना जा रहा है. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ईरान के साथ युद्ध की परिस्थितियों से गुजर रहा है और अंतरराष्ट्रीय हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं.
अमेरिकी डॉलर 165 वर्षों से बिना किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के ही छपता आया है. लेकिन अब यह परंपरा टूटने जा रही है. ट्रेजरी ने घोषणा की है कि डॉलर नोटों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के हस्ताक्षर एक साथ दिखाई देंगे. इस कदम को राष्ट्रपति के नेतृत्व का ऐतिहासिक सम्मान माना जा रहा है.
अमेरिकी ट्रेजरर ब्रैंडन बीच ने साफ किया कि यह बदलाव देश की 250वीं वर्षगांठ को खास बनाने के लिए किया गया है. उन्होंने कहा कि नोटों पर ट्रंप के हस्ताक्षर आने वाले लंबे समय तक उनके कार्यकाल का प्रतीक बने रहेंगे. ट्रेजरी का मानना है कि यह कदम अमेरिका की आर्थिक उपलब्धियों और नेतृत्व को दर्शाता है.
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में देश आर्थिक रूप से मजबूत दिशा में बढ़ रहा है. उनके अनुसार, डॉलर की स्थिरता और वित्तीय मजबूती इस सरकार की उपलब्धि है. ट्रंप के हस्ताक्षर को इसी विकास का सम्मान बताकर पेश किया गया है.
ट्रेजरी विभाग ने रॉयटर्स को बताया कि सबसे पहले 100 डॉलर के नोटों पर ट्रंप और बेसेंट के हस्ताक्षर छापे जाएंगे. इसके बाद, अन्य नोटों की छपाई धीरे-धीरे शुरू होगी. फिलहाल, छपाई में बाइडन सरकार की ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन और ट्रेजरर लिन मालेरबा के हस्ताक्षर शामिल हैं.
ट्रेजरी ने स्पष्ट किया है कि नोटों के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. केवल हस्ताक्षरों का अद्यतन किया जाएगा. इससे पहले ट्रंप के सम्मान में 1 डॉलर का सिक्का जारी करने की कोशिश हुई थी, पर कानून के अनुसार जीवित व्यक्तियों की तस्वीर सिक्कों पर नहीं छापी जा सकती, इसलिए यह प्रस्ताव खारिज हो गया था.