मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति और आक्रामक रुख को और स्पष्ट कर दिया है. अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने गुरुवार को कहा कि आज ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा. उन्होंने भरोसा जताया कि यह संघर्ष लंबा नहीं चलेगा और अमेरिका अपने तय लक्ष्यों को हासिल करके ही पीछे हट जाएगा. इस बीच, युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रशासन ने उनके बलिदान को याद किया.
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस संघर्ष की शुरुआत से ही उसके लक्ष्य स्पष्ट रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में तय रणनीति के तहत ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना प्राथमिकता है. रक्षा मंत्री ने कहा कि यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं है, बल्कि एक योजनाबद्ध अभियान है, जिसे तय समय और लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है.
अमेरिकी सेना अब तक हजारों ठिकानों को निशाना बना चुकी है. उसने ईरान के मिसाइल लॉन्चर, रक्षा ढांचा और नौसेना क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, ईरान की वायु रक्षा प्रणाली लगभग निष्क्रिय हो चुकी है. इसके साथ ही ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में भी भारी कमी आई है, जो अमेरिकी कार्रवाई के असर को दिखाता है.
रक्षा मंत्री ने दावा किया कि ईरान की नौसेना को गंभीर नुकसान हुआ है और कई जहाज नष्ट किए जा चुके हैं. पनडुब्बियों की क्षमता भी खत्म होने के करीब बताई गई है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के सैन्य नेतृत्व पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिससे उनकी कमान कमजोर पड़ रही है और नई रणनीति बनाना मुश्किल हो रहा है.
अमेरिका ने साफ किया है कि जब तक उसके सभी लक्ष्य पूरे नहीं होते, तब तक यह अभियान जारी रहेगा. प्रशासन का मानना है कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हैं. इसलिए यह सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है. अमेरिका ने अपने सहयोगियों और दुनिया से इस रुख को समझने और समर्थन देने की अपील की है.