नई दिल्ली: अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान को लेकर हालात बेहद गंभीर होते नजर आ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि अगले कुछ घंटों या फिर 24 से 48 घंटों के भीतर ईरान पर बड़ा सैन्य हमला हो सकता है.
इस संभावित खतरे के चलते मध्य पूर्व में हलचल तेज हो गई है और कई देशों ने अपनी सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी हैं. इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को हाई अलर्ट पर ला दिया है.
Unofficial:
— Daily Iran News (@DailyIranNews) January 24, 2026
Some Israeli sources: The Americans have informed Iraq, Jordan, Saudi Arabia, and the UAE that an attack on Iran will begin soon.
Some sources also claimed that much of America's equipment arrived in the Middle East during radar blackouts, and no one knows the…
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं. हालांकि, अभी तक किसी भी देश की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक संकेतों ने इन अटकलों को और मजबूत कर दिया है. मध्य पूर्व में तनाव अब अपने चरम पर पहुंचता दिख रहा है.
इस बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है. अमेरिकी नौसेना का यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इसके अलावा कई अतिरिक्त टैंकर विमान जैसे KC-135 और KC-46 भी तैनात किए गए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड और अन्य सैन्य इकाइयों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. ट्रंप प्रशासन ईरान की मिसाइल क्षमताओं और वहां चल रहे आंतरिक विरोध प्रदर्शनों पर दमन को लेकर पहले से ही सख्त रुख अपनाए हुए है.
ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर देश पर हमला हुआ तो उसे पूरी तरह से युद्ध माना जाएगा और उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा. ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने भी दावा किया है कि उनकी सेना पूरी तरह तैयार है और 'ट्रिगर पर उंगली' रखी हुई है. तेहरान का कहना है कि किसी भी आक्रमण का जवाब बेहद सख्त होगा.
इजरायल भी इस पूरे घटनाक्रम के बीच हाई अलर्ट पर है. तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने बयान दिया है कि इजरायल ईरान पर हमला करने के अवसर तलाश रहा है. उन्होंने इस मुद्दे को लेकर चिंता जाहिर की और क्षेत्र में युद्ध की आशंका की बात कही. इससे साफ है कि हालात सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व पर इसका असर पड़ सकता है.
तनाव का सीधा असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा है. ईरान और इजरायल के ऊपर से गुजरने वाली कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं. केएलएम, एयर फ्रांस, ब्रिटिश एयरवेज और लुफ्थांसा जैसी प्रमुख एयरलाइनों ने तेल अवीव, दुबई, सऊदी अरब और यूएई के लिए अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं.
अमेरिका ने भी खराब मौसम का हवाला देकर करीब 8400 उड़ानें दो दिनों के लिए रद्द की हैं. ईरान ने भी अपनी कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स को रद्द किया है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि जेरेड कुश्नर की इजरायल यात्रा के चलते हमला टला हुआ है, लेकिन उनकी वापसी के बाद स्थिति बदल सकती है.
फिलहाल कोई हमला नहीं हुआ है, लेकिन हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय एक छोटी सी चूक भी बड़े युद्ध में बदल सकती है. ईरान के अंदर चल रहे विरोध प्रदर्शन, इंटरनेट बंदी और अमेरिका का दबाव स्थिति को और जटिल बना रहे हैं. पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हैं और सभी सांस रोककर अगले घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं.
अभी तक कोई हमला नहीं हुआ है, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक है. एक छोटी गलती भी पूर्ण युद्ध में बदल सकती है. ईरान के आंतरिक संकट (प्रदर्शन, इंटरनेट ब्लैकआउट) और अमेरिकी दबाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है.