नई दिल्ली: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को अपने ईरानी समकक्ष सैय्यद अब्बास अराघची से बात की और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की. 28 फरवरी के बाद से यह उनकी तीसरी बातचीत थी. जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद पूरे इलाके के कई देशों पर जवाबी हमले हुए थे.
जयशंकर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'आज शाम, मैंने ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची के साथ चल रहे संघर्ष के बारे में ताजा घटनाक्रम पर डिटेल में चर्चा की. हम संपर्क में रहने पर सहमत हुए.' दोनों मंत्री पहले भी दो बार बात कर चुके हैं. पहले 28 फरवरी को और फिर 5 मार्च को.
A detailed conversation this evening with Foreign Minister @araghchi of Iran on the latest developments regarding the ongoing conflict. We agreed to remain in touch.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) March 10, 2026
इसके अलावा एस. जयशंकर ने मंगलवार को अपने जर्मन और साउथ कोरियन काउंटरपार्ट्स से भी बात की, क्योंकि नई दिल्ली वेस्ट एशिया संकट खासकर एनर्जी सप्लाई पर इसके असर को सुलझाने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशें तेज कर रही है.
Exchanged views with FM @JoWadephul of Germany on the ongoing conflict in West Asia. @AussenMinDE
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) March 10, 2026
जयशंकर ने पार्लियामेंट में क्या कहा?
एस. जयशंकर ने सोमवार को पार्लियामेंट में कहा कि कोशिशें की गई हैं, लेकिन इस समय लीडरशिप लेवल पर ईरान से कॉन्टैक्ट करना साफ तौर पर मुश्किल है. जयशंकर ने कहा कि वेस्ट एशिया में लड़ाई के दौरान ईरानी लीडरशिप लेवल पर कई लोग मारे गए हैं और सरकार के तीन खास मैसेज बताए: दिल्ली शांति और बातचीत की वापसी का सपोर्ट करती है, भारतीय प्रवासी की सेफ्टी प्राथमिकता है और एनर्जी सिक्योरिटी सबसे ऊपर होगी.
A good conversation with @FMChoHyun of RoK.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) March 10, 2026
Discussed advancing our bilateral agenda. As also the situation in West Asia, including its energy implications.
जयशंकर जिन्होंने 'वेस्ट एशिया के हालात' पर राज्यसभा में एक बयान दिया, उन्होंने कहा कि लड़ाई शुरू होने के बाद से लगभग 67,000 इंडियन सिटिजन कॉन्फ्लिक्ट जोन से वापस आ चुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी पक्ष ने 28 फरवरी को इलाके में 'तीन जहाजों' को भारतीय बंदरगाहों पर खड़ा करने की अनुमति मांगी थी, जो 1 मार्च को दे दी गई.