गुरुग्राम: गुरुग्राम रेलवे स्टेशन को मेट्रो रूट से जोड़ने के लिए तीन ऑप्शन पर विचार किया जा रहा है. ये ऑप्शन बुधवार को गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड यानी GMRL की बोर्ड मीटिंग में पेश किए जाएंगे. इनके फायदे और नुकसान पर चर्चा की जाएगी. इसके बाद किसी एक ऑप्शन पर फैसला किया जाएगा.
जब आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय यानी मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स ने ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, तो कहा गया था कि रेलवे स्टेशन को मेट्रो रूट से जोड़ने की संभावना तलाशी जानी चाहिए. इसके बाद GMRL मीटिंग में रेलवे स्टेशन को ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के सेक्टर 5 चौक से जोड़ने के लिए एक अलग DPR तैयार करने का फैसला किया गया.
GMRL ने वर्ल्ड बैंक से लोन मांगा था. GMRL ने इस 1.8 km के मेट्रो रूट को अपनी DPR में शामिल किया और लोन अप्रूवल के लिए वर्ल्ड बैंक को भेजा. वर्ल्ड बैंक ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि सेक्टर 5 से रेलवे स्टेशन तक का मेट्रो सेक्शन पहले अप्रूव्ड DPR का हिस्सा नहीं था. इस सेक्शन के लिए सोशल और एनवायर्नमेंटल स्टडी अभी तक नहीं हुई हैं.
इसलिए फंड मिलने में देरी से बचने के लिए इस सेक्शन को ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो रूट से बाहर कर देना चाहिए. GMRL के मौजूदा प्लान के मुताबिक हर दो मिनट 10 सेकंड में यात्रियों को मेट्रो सर्विस मिलेगी. इससे काफी राहत मिलेगी.
रेलवे स्टेशन को ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट से जोड़ा जाना चाहिए. इस कनेक्शन से भोंडसी से रेलवे स्टेशन तक प्रस्तावित मेट्रो लाइन के लिए अलग मेट्रो डिपो की जरूरत खत्म हो जाएगी. इसका नुकसान यह है कि इस सेक्शन के लिए वर्ल्ड बैंक से अलग सोशल और एनवायर्नमेंटल स्टडी और अप्रूवल की जरूरत होगी. मिलेनियम सिटी सेंटर से रेलवे स्टेशन तक कम मेट्रो सर्विस चलेंगी.
पानी की लाइनें दूसरी जगह लगाई जाएंगी. इस 1.8 km हिस्से पर एक अलग मेट्रो लाइन बनाई जाएगी. इससे ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के लिए वर्ल्ड बैंक से लोन मिलने में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा. इसके लिए एक अलग मेट्रो डिपो और वर्कशॉप बनाया जाएगा. GMRL अप्रैल के पहले हफ्ते में ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो लाइन और स्टेशन बनाने के लिए जरूरी पानी, बिजली, सीवर और ट्रीटेड पानी की लाइनों को दूसरी जगह लगाने का काम शुरू कर देगी.