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India Daily

'पुतिन को बातचीत की मेज पर नहीं, बल्कि...', शांति वार्ता से पहले रूस पर क्यों भड़क उठा यूक्रेन?

यूक्रेनी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार तड़के रूस ने यूक्रेन के दो सबसे बड़े शहरों कीव और खारकीव को निशाना बनाया. इन हवाई हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कम से कम 23 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

Anuj
Edited By: Anuj
'पुतिन को बातचीत की मेज पर नहीं, बल्कि...', शांति वार्ता से पहले रूस पर क्यों भड़क उठा यूक्रेन?
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रहा युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है. अमेरिका की मध्यस्थता में आबूधाबी में प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं.

यूक्रेन ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बातचीत से ठीक पहले रूस ने उसके बड़े शहरों पर भारी हमला किया है. इस घटनाक्रम ने शांति प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

रूस पर गंभीर आरोप

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबीहा ने शनिवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर सीधा हमला बोला. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जिस समय यूक्रेन, रूस और अमेरिका के प्रतिनिधि शांति वार्ता के लिए आबूधाबी में मौजूद हैं, उसी समय रूस ने यूक्रेन पर मिसाइल हमले किए. सिबीहा ने कहा कि ऐसे हमले यह साबित करते हैं कि पुतिन को बातचीत की मेज पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अदालत में जवाब देना चाहिए.

मिसाइल और ड्रोन से हमला

यूक्रेनी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार तड़के रूस ने यूक्रेन के दो सबसे बड़े शहरों कीव और खारकीव को निशाना बनाया. इन हवाई हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कम से कम 23 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

यूक्रेनी वायुसेना ने बताया कि इस हमले में रूस ने करीब 375 ड्रोन और 21 मिसाइलों का इस्तेमाल किया. एक बार फिर रूस ने यूक्रेन की ऊर्जा व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की. हमलों के बाद राजधानी कीव के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई.

'पुतिन खुलेआम घूम रहे हैं'

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की कई बार पुतिन के खिलाफ कड़े बयान दे चुके हैं. उन्होंने अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति मादुरो के खिलाफ की गई कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा था कि अगर तानाशाहों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा सकता है, तो दुनिया जानती है कि पुतिन के साथ क्या किया जाना चाहिए. जेलेंस्की ने यह भी कहा था कि मादुरो न्यूयॉर्क की अदालत में न्याय का सामना कर रहे हैं, जबकि पुतिन अब भी खुलेआम घूम रहे हैं.

'नतीजे की उम्मीद करना ठीक नहीं'

आबूधाबी में होने वाली शांति वार्ता को लेकर जेलेंस्की ने पहले ही साफ कर दिया था कि पहले ही दिन किसी नतीजे की उम्मीद करना ठीक नहीं होगा. उनके अनुसार, सबसे जरूरी बात यह है कि रूस यह दिखाए कि वह सच में युद्ध खत्म करना चाहता है. उन्होंने कहा कि सिर्फ बातचीत की बात करना काफी नहीं है, जमीन पर भी कदम उठाने होंगे.

शांति वार्ता की राह आसान नहीं

वहीं, रूस की ओर से क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव का बयान भी सामने आया है. उन्होंने कहा कि रूस अपनी मांगों से पीछे हटने वाला नहीं है. पेसकोव के मुताबिक, रूस ने डोनबास क्षेत्र को लेकर अपनी शर्तें नहीं बदली हैं. डोनबास यूक्रेन के लिए बेहद अहम इलाका है, जिसमें औद्योगिक रूप से मजबूत दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्र शामिल हैं. ऐसे में साफ है कि शांति वार्ता की राह आसान नहीं होने वाली है.