Uranus and Neptune: हाल ही में हुई एक रिसर्च में बड़ा खुलासा हुआ है. दो ऐसे ग्रह हैं जहां पर पानी होने की बात कही गई है. यूरेनस और नेपच्यून में जमी मीथेन की बर्फ को वैज्ञानिकों ने पानी बताया है. रिसर्च में कहा गया कि इन दोनों ग्रहों पर मीथेन की बर्फ जमी है. और यह जमी हुई बर्फ पानी ही है.
स्पेस डॉट कॉम के मुताबिक यह खोज दुनिया के लिए सोच से परे हैं. यह रिसर्च यूरेनस और नेपच्यून के निर्माण को दर्शाने का काम कर रहे हैं.
1980 में नासा के नासा का वोयाजर 2 अंतरिक्ष यान ने दोनों ग्रहों की झलकियां दिखाई थी. इन झलकियों से वैज्ञानिकों को इसकी सतही जानकारी के बारे में एक अनुमान मिला. वैज्ञानिकों ने भी अनुमान लगाया था कि यहां ऑक्सीजन, कार्बन और हाइड्रोजन भी हो सकती है.
एस्ट्रोनॉमर्स ने वोयाजर 2 अंतरिक्ष यान और टेलिस्कोप से मिले डाटा के आधार पर मॉडल तैयार किया. यह मॉडल हाइड्रोजन और हीलियम की लेयर को पानी और अमोनिया की एक चट्टान के रूप में प्रस्तुत करता है. रिसर्च में ये अनुमान लगाया गया कि बर्फ की विशाल चट्टानों में पृथ्वी के महासागरों से हजारों गुना अधिक पानी हो सकता है.
arXiv पर पब्लिश हुई इस रिसर्च में बताया गया है कि यूरेनस और नेपच्यून पर मीथेन बर्फ का निर्माण तब हुआ होगा जब ग्रहों का निर्माण हुआ होगा. अगर मीथेन है तो हाइड्रोजन और कार्बन का होना भी लाजामी है. इन दोनों ग्रहों को लेकर समय-समय पर कई तरह की शोधों में कई खुलासे किए गए हैं. मिथेन की बर्फ को पानी बताना का सीधा मतलब जीवन होना. पानी का मतलब हाइड्रोजन और ऑक्सीजन. ऑक्सीजन के होने से यहां जीवन की कल्पना की जा सकती है. हालांकि, अभी वैज्ञानिकों में भी मतभेद है.