नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के बीच व्यापार से जुड़े रिश्तों को लेकर एक अहम संकेत सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को हटाने की दिशा में कदम उठा सकती है. अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस संबंध में बड़ा बयान दिया है.
उन्होंने कहा कि भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ अमेरिका के लिए काफी हद तक सफल साबित हुआ है. बेसेंट के अनुसार इस टैरिफ के बाद भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद में साफ तौर पर गिरावट देखी गई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह टैरिफ लागू है, लेकिन इसे स्थायी व्यवस्था नहीं माना जा रहा है.
"There is a path to take them off": US Treasury Secy Bessent hints at rolling back 25% tariffs on India over Russian oil purchase
— ANI Digital (@ani_digital) January 24, 2026
Read @ANI Story | https://t.co/zZtODMTV4W#India #US #Russia #Oil #Tariffs pic.twitter.com/3lH4hR2Mb9
स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए कि आने वाले समय में भारत को इस टैरिफ से राहत मिल सकती है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए इसे हटाने का एक रास्ता निकल सकता है. यह बयान ऐसे समय पर आया है जब वैश्विक स्तर पर रूस से तेल व्यापार और उस पर लगे प्रतिबंधों को लेकर चर्चा तेज है.
अमेरिका का मानना है कि भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर दबाव बनाकर रूस की आय को सीमित किया जा सकता है. वर्तमान में अमेरिका ने भारत से आने वाले कई उत्पादों पर कुल मिलाकर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा रखा है.
इसमें से लगभग 25 प्रतिशत सामान्य टैरिफ है, जो भारत के करीब 55 प्रतिशत निर्यात पर लागू होता है. इसके अलावा अगस्त 2025 से एक अतिरिक्त 25 प्रतिशत का पेनल्टी टैरिफ लगाया गया है. यह पेनल्टी टैरिफ खास तौर पर रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव बनाने के उद्देश्य से जोड़ा गया था.
अमेरिका, G7 और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर एक प्राइस कैप सिस्टम भी लागू किया हुआ है. इस सिस्टम के तहत जनवरी 2026 तक रूसी तेल की अधिकतम कीमत करीब 47.60 डॉलर प्रति बैरल तय की गई है. 1 फरवरी 2026 से इस प्राइस कैप को घटाकर 44.10 डॉलर प्रति बैरल करने की योजना है. नियम के अनुसार अगर रूसी तेल तय सीमा से ज्यादा कीमत पर बेचा जाता है, तो उस तेल को बीमा, शिपिंग और फाइनेंस जैसी सेवाएं नहीं दी जाएंगी.
अमेरिका का दावा है कि इन कड़े नियमों और टैरिफ के कारण भारत ने रूसी तेल की खरीद में कटौती की है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रिलायंस जैसी बड़ी भारतीय रिफाइनरियों ने जनवरी 2026 में रूसी तेल लेना रोक दिया है.
हालांकि भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतें राष्ट्रीय हित और किफायती दामों को ध्यान में रखकर तय करता है. भारत ने यह भी कहा है कि वह अमेरिका के प्रस्तावित 500 प्रतिशत टैरिफ वाले बिल पर करीबी नजर बनाए हुए है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया जाता है, तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में नई मजबूती आ सकती है.