अलास्का समिट के एक महीने बाद, जहां डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को लेकर शांति वार्ता की कोशिश की थी, कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया. गुरुवार को लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि पुतिन ने उन्हें निराश किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध अभी भी पूरी ताकत के साथ जारी है और इसमें बड़ी संख्या में लोग मारे जा रहे हैं.
ट्रंप ने मीडिया से कहा, 'उन्होंने मुझे निराश किया है. उन्होंने वास्तव में मुझे निराश किया है.' उन्होंने ट्वीट में लिखा कि पुतिन कई लोगों को मार रहे हैं और साथ ही अपने द्वारा मारे जा रहे लोगों से अधिक खुद गंवा रहे हैं. ट्रंप का आरोप है कि पुतिन ने युद्ध को रोकने या शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
अलास्का समिट और युद्ध की स्थिति
15 अगस्त को हुए अलास्का समिट में ट्रंप और पुतिन के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया. यूरोप के सबसे घातक संघर्ष में तब से कोई कमी नहीं आई है. अगस्त में ही खार्किव में रूसी मिसाइल हमले में कम से कम 47 लोग घायल हुए थे. रूस ने दावा किया कि यह हमला यूक्रेन के ड्रोन हमले के जवाब में किया गया था. इस बीच, रूस के सैनिक पूर्वी यूक्रेन में महत्वपूर्ण शहरों की ओर बढ़ रहे हैं.
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में सात ऐसे संघर्ष हल किए हैं जिन्हें 'सुलझाया नहीं जा सकता' माना जाता था. उन्होंने उम्मीद जताई कि यूक्रेन युद्ध में भी जल्द ही अच्छे समाचार आ सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध सीधे तौर पर अमेरिका को प्रभावित नहीं करता, फिर भी उन्हें इसे हल करने की जिम्मेदारी महसूस होती है. ट्रंप ने 2024 के राष्ट्रपति अभियान में यह वादा किया था कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो युद्ध 24 घंटे में समाप्त कर देंगे.
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से कई बार बातचीत की है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि पुतिन पर दबाव बढ़ाने की जरूरत है और जब ही ट्रंप ने दबाव डाला, पुतिन ने किसी तरह की कार्रवाई करने की झलक दिखाई. यह संकेत देता है कि युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक दबाव महत्वपूर्ण है.
ट्रंप ने एक बार फिर जोर देकर कहा कि युद्ध को रोकना उनका कर्तव्य है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में शांति की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं. ट्रंप का संदेश स्पष्ट है कि युद्ध को रोकने और पीड़ितों की संख्या कम करने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता है. उन्होंने इसे अपने अनुभव और शांति वार्ता में मिली सीखों का उपयोग करने का अवसर बताया.