अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर तीखा बयान देते हुए न्यायाधीशों की आलोचना की है. उनका कहना है कि यह व्यवस्था गलत तरीके से इस्तेमाल हो रही है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करने वाला है, जिससे इसकी संवैधानिक वैधता पर चर्चा और तेज हो गई है. यह मुद्दा न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता का उद्देश्य चीन या दुनिया भर के अमीर लोगों को फायदा देना नहीं है. उन्होंने इसे गुलामों के बच्चों के अधिकार से जोड़ा और कहा कि वर्तमान में इसका गलत उपयोग हो रहा है. साथ ही उन्होंने न्यायपालिका की आलोचना करते हुए कुछ फैसलों को कमजोर बताया. उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है.
अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता 1868 में लागू 14वें संशोधन के तहत दी गई थी. इसका उद्देश्य गुलामी से मुक्त हुए लोगों के अधिकारों की रक्षा करना था. इस प्रावधान के अनुसार, देश में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति नागरिक माना जाता है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह नियम अब पुराने समय का है और वर्तमान परिस्थितियों में इसका पुनर्मूल्यांकन जरूरी है.
दुनिया के लगभग 36 देशों में जन्म के आधार पर नागरिकता दी जाती है, जिसे ‘जस सोली’ कहा जाता है. लेकिन कई देशों ने समय के साथ इसे समाप्त कर दिया है. आयरलैंड, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, भारत और पाकिस्तान जैसे देशों ने इस नीति में बदलाव किया है. अब कई जगह नागरिकता वंश के आधार पर दी जाती है, जिसे ‘जस सैंगुइनिस’ कहा जाता है.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस बहस का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है. यदि कोर्ट किसी बदलाव का संकेत देता है, तो इससे अमेरिका की नागरिकता नीति पर बड़ा असर पड़ेगा. साथ ही, यह फैसला वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकता है. फिलहाल सभी की नजर इस पर टिकी है कि अदालत क्या रुख अपनाती है.