खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव ने कारोबार और ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों की जरूरत बढ़ा दी है. इसी बीच ओमान का सोहर पोर्ट चर्चा में है. होर्मुज के बाहर स्थित यह बंदरगाह भारत के लिए खाड़ी बाजारों तक पहुंच का वैकल्पिक गेटवे बन सकता है.
भारत और सोहर के बीच फीडर जहाजों की आवाजाही में करीब चार गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे संकेत मिलता है कि खाड़ी में मौजूदा हालात के बीच कारोबारी अपने माल के लिए दूसरे लॉजिस्टिक्स विकल्प तलाश रहे हैं. भारत से आने वाला कुछ कार्गो पहले सोहर पहुंच रहा है और वहां से सड़क मार्ग के जरिए खाड़ी के बाजारों तक भेजा जा रहा है. इस व्यवस्था से सीधे समुद्री मार्ग पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है.
सोहर की अहमियत सिर्फ कंटेनर कारोबार तक सीमित नहीं है. सऊदी अरब ने भी अपने कच्चे तेल की आवाजाही के लिए सोहर का इस्तेमाल बढ़ाया है. रॉयटर्स के मुताबिक, सितंबर और अक्टूबर में करीब 6 करोड़ बैरल कच्चे तेल को सऊदी अरब के रास तनुरा से सोहर के पास शिप-टू-शिप ट्रांसफर के जरिए भेजने की योजना है. इन आपूर्तियों के खरीदारों में भारत समेत एशियाई देश शामिल हैं.
सोहर की रणनीतिक अहमियत को सड़क और रेल नेटवर्क भी बढ़ा सकते हैं. ओमान और यूएई के बीच 238 किलोमीटर लंबे रेल लिंक पर काम चल रहा है, जिसका एक प्रमुख सिरा सोहर से जुड़ता है. अप्रैल 2026 तक परियोजना का 40 फीसदी काम पूरा होने की जानकारी ओमान सरकार ने दी थी. यह नेटवर्क तैयार होने पर सोहर से यूएई के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक माल पहुंचाना आसान हो सकता है.
सोहर को फिलहाल होर्मुज का सीधा विकल्प कहना जल्दबाजी होगी. इसकी भूमिका मुख्य रूप से वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स और ट्रांस-शिपमेंट हब के तौर पर उभर रही है. होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर भारत के लिए सोहर के जरिए खाड़ी बाजारों तक कार्गो पहुंचाने का एक अतिरिक्त रास्ता उपलब्ध हो सकता है. हालांकि इसकी वास्तविक क्षमता समुद्री सुरक्षा, सड़क-रेल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय हालात पर निर्भर करेगी.