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यूरेनियम को लेकर भारत की कनाडा के साथ 'मेगाडील', PM मोदी-कार्नी की मीटिंग में बनी सहमति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की नई दिल्ली में हुई शिखर मुलाकात ने भारत-कनाडा संबंधों को नई ऊर्जा दी है. दोनों नेताओं ने व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को जल्द अंतिम रूप देने और सिविल न्यूक्लियर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. 

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
यूरेनियम को लेकर भारत की कनाडा के साथ 'मेगाडील', PM मोदी-कार्नी की मीटिंग में बनी सहमति
Courtesy: ani

नई दिल्ली: भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ सालों की खटास अब दूर होती दिख रही है. पीएम मोदी ने मार्क कार्नी का भारत में गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि दोनों देश लोकतंत्र, विविधता और मानवता के मूल्यों पर एकजुट हैं. कार्नी का यह पहला भारत दौरा है.

मुलाकात में आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता दी गई. कनाडाई पेंशन फंड्स ने भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश किया है. दोनों नेता बिजनेस लीडर्स से भी मिले. मध्य पूर्व की स्थिति पर भी चर्चा हुई. यह मुलाकात रिश्तों को मजबूत करने का बड़ा कदम साबित हुई है.

व्यापार और निवेश में नई ऊंचाई

पीएम मोदी ने कहा कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है. व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को जल्द पूरा करने का फैसला हुआ. इससे दोनों देशों में निवेश और रोजगार बढ़ेंगे. मोदी ने कार्नी को सहयोग की गति के लिए श्रेय दिया. कनाडाई पेंशन फंड्स के 100 अरब डॉलर निवेश को भारत की विकास यात्रा में विश्वास का प्रतीक बताया. दोनों नेता बिजनेस लीडर्स से मिलकर सुझाव भी ले रहे हैं.

यूरेनियम और न्यूक्लियर सहयोग की राह

भारत कनाडा से यूरेनियम की आपूर्ति के लिए लंबे समय से प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देना चाहता है. सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में प्रगति की उम्मीद जगी है. कार्नी ने कहा कि भारत में ऊर्जा, तकनीक और सेवाओं की मांग तेज है और कनाडा इसे पूरा करने को तैयार है. महत्वपूर्ण खनिज और रिन्यूएबल एनर्जी पर MoU से सहयोग और गहरा होगा. 

तकनीक और संस्कृति में नए समझौते

मुलाकात में भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेक्नोलॉजी-इनोवेशन MoU पर हस्ताक्षर हुए. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कनाडाई मंत्री मनिंदर सिद्धू ने दस्तावेज साझा किए. तीन अन्य MoU महत्वपूर्ण खनिज, रिन्यूएबल एनर्जी और सांस्कृतिक सहयोग पर हुए. अनीता आनंद और जयशंकर ने इन्हें मोदी-कार्नी की मौजूदगी में आदान-प्रदान किया.

खराब रिश्तों से सुधार की ओर

2023 में ट्रूडो के आरोपों से रिश्ते बिगड़े थे. भारत ने आरोप खारिज किए और कूटनीतिज्ञों को वापस बुलाया. मार्क कार्नी ने सत्ता संभालने के बाद सुधार की कोशिश की. उच्चायुक्तों की वापसी हुई. पिछले साल G7 में मोदी-कार्नी की मुलाकात से रिश्ते पटरी पर आए. अब यह दौरा नई साझेदारी का मजबूत आधार बन रहा है.