नई दिल्ली: दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों में चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-ईरान तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है. हाल के दिनों में हमले और जवाबी कार्रवाई तेज होने की खबरें सामने आई हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कहीं इन क्षेत्रीय संघर्षों का असर बड़ा होकर वैश्विक टकराव में न बदल जाए.
हालांकि, फिलहाल दोनों मोर्चे सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध में बदलते नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ता सैन्य तनाव चिंता जरूर बढ़ा रहा है. एक छोटी-सी गलती, ड्रोन हमला या मिसाइल का गलत निशाना स्थिति को और गंभीर बना सकता है.
रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग अब सिर्फ दोनों देशों की सीमा तक सीमित नहीं रह गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन ने रूसी इलाकों के भीतर ड्रोन हमलों को बढ़ाने की तैयारी के संकेत दिए हैं. 1 सितंबर को कीव के एक रेलवे डिपो पर रूसी बैलिस्टिक मिसाइल हमले में छह रेल कर्मचारियों की मौत की बात सामने आई. इसके बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों को लेकर चेतावनी दी.
जेलेंस्की की इस चेतावनी पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. रूस की ओर से इसे बेहद गंभीर कदम बताया गया है. वहीं, रूस की ओर से भी यूक्रेन के बिजली, पानी और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें हैं. इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष लगातार ज्यादा खतरनाक रूप ले रहा है.
रूस-यूक्रेन तनाव का असर यूरोप में भी देखने को मिल रहा है. जर्मनी ने लीपजिग एयरपोर्ट पर एक यूक्रेनी कार्गो एयरक्राफ्ट को निशाना बनाने की कथित साजिश में रूस की भूमिका का आरोप लगाया है. रिपोर्ट के अनुसार, जांच में रूसी नेटवर्क से जुड़े लोगों और तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल के संकेत मिलने की बात कही गई है. इसके बाद जर्मनी ने रूस के खिलाफ सख्त कदम उठाने का संकेत दिया है.
नाटो ने भी जर्मनी के समर्थन में अपनी स्थिति स्पष्ट की है. इससे NATO और Russia के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. यूरोपीय स्तर पर रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों की तैयारी की भी चर्चा है.
दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच भी हालात गंभीर बताए जा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष-विराम के बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज हुई है. अमेरिकी सेना की ओर से ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने की बात कही गई है.
इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों से निशाना बनाने का दावा किया है. ईरान ने अमेरिकी हमलों में नागरिक इलाकों को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया है. वहीं, अमेरिका ने किसी भी नई कार्रवाई का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है.
रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव निश्चित रूप से पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है. हालांकि, अभी इन दोनों संघर्षों को तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत कहना जल्दबाजी होगी. सबसे बड़ा खतरा यह है कि अगर किसी हमले में किसी दूसरे देश के सैनिक या महत्वपूर्ण ठिकाने सीधे प्रभावित होते हैं, तो कई देश संघर्ष में शामिल हो सकते हैं. इससे स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकती है.
भारत समेत दुनिया के कई देश लगातार बातचीत और शांति के रास्ते पर जोर देते रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत में युद्ध को खत्म करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया था. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर दोनों मोर्चों पर बनी हुई है.