विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, प्रशांत महासागर के तेजी से गर्म होने के कारण अल-नीनो बेहद शक्तिशाली रूप ले रहा है. यह स्थिति अगले सात महीनों तक यानी फरवरी तक बनी रह सकती है. यदि यह पैटर्न जारी रहा, तो यह 1950 के बाद का सबसे भीषण अल-नीनो साबित होगा.
समुद्र की सतह से लेकर गहराई तक तापमान में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अगस्त में नीनो-3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 2.2 से 2.6 डिग्री सेल्सियस अधिक पहुंच गया, जबकि गहराई में यह 8 डिग्री तक गर्म पाया गया. यही अतिरिक्त गर्मी अल-नीनो को अधिक आक्रामक बना रही है.
प्रशांत महासागर की यह गर्मी मानसूनी हवाओं की दिशा बदल देती है. अगस्त में भारत में 16 प्रतिशत कम बारिश हुई, जो 1901 के बाद सबसे गर्म अगस्त दर्ज हुआ. सितंबर में भी कम बारिश और असमान वितरण से कहीं सूखा तो कहीं अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है.
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इसका असर सिर्फ मानसून तक सीमित नहीं रहेगा. अल-नीनो के असर से इस बार सर्दियों में भी तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है. उत्तर भारत में ठंड का मौसम छोटा होने और फरवरी-मार्च से ही प्रचंड गर्मी शुरू होने की आशंका है.
साल 2023-24 के अल-नीनो ने 2024 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनाया था. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के प्रभाव से 2027 दुनिया के इतिहास का सबसे गर्म साल बन सकता है.