नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping की सेहत को लेकर एक नए दावे ने उनकी राजनीतिक स्थिति और संभावित उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा तेज कर दी है. निर्वासित तिब्बती सरकार के पूर्व प्रमुख Lobsang Sangay ने कहा कि एक वरिष्ठ पूर्व चीनी अधिकारी ने उन्हें बताया था कि Xi को कम से कम दो बार हार्ट अटैक आया है. हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण या मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है.
Lobsang Sangay ने 3 सितंबर को प्रकाशित ANI Podcast में Xi की सेहत को लेकर यह दावा किया. उनके अनुसार, एक वरिष्ठ पूर्व चीनी अधिकारी से एक घंटे से अधिक बातचीत के दौरान उन्हें राष्ट्रपति की तबीयत के बारे में जानकारी मिली. Sangay ने Xi के हालिया सार्वजनिक कार्यक्रमों और उनके हावभाव का भी जिक्र किया. हालांकि, ये बातें किसी चिकित्सकीय दस्तावेज या स्वतंत्र स्रोत से प्रमाणित नहीं हैं.
Sangay ने Xi के चलने के तरीके और उनके रूप-रंग में बदलाव का हवाला देते हुए स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने यह भी दावा किया कि Xi मानसिक दबाव या ‘मेंटल फॉग’ जैसी स्थिति से गुजर रहे हैं. Sangay ने इसे चीन के सैन्य नेतृत्व में हुए बदलावों से जोड़ने की कोशिश की. हालांकि, इन दावों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र चिकित्सकीय प्रमाण सामने नहीं आया है.
इंटरव्यू में Sangay ने Xi के संभावित उत्तराधिकारी के सवाल को भी उठाया. उन्होंने इसे ‘Emperor’s dilemma’ बताया. उनका तर्क है कि शक्तिशाली नेता अगर समय रहते उत्तराधिकारी घोषित करता है, तो वह व्यक्ति भविष्य में उसके लिए चुनौती बन सकता है. दूसरी ओर, उत्तराधिकारी तय नहीं करने पर सत्ता परिवर्तन के समय संघर्ष और अनिश्चितता पैदा हो सकती है. Sangay के मुताबिक, इसी कारण Xi सार्वजनिक रूप से उत्तराधिकारी घोषित करने से बच सकते हैं.
Xi की सेहत को लेकर सोशल मीडिया पर पहले भी कई तरह के दावे सामने आते रहे हैं. अक्सर उनकी सार्वजनिक मौजूदगी कम होने पर ऐसी चर्चाएं तेज हो जाती हैं. दूसरी ओर, चीनी सरकारी सूत्रों के अनुसार Xi 3 सितंबर को किर्गिस्तान में SCO Summit में हिस्सा लेने और मिस्र की राजकीय यात्रा के बाद बीजिंग लौटे. इससे यह जरूर पता चलता है कि वह उच्चस्तरीय गतिविधियों में सक्रिय हैं, लेकिन इससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.
Lobsang Sangay 2011 से 2021 तक Central Tibetan Administration के निर्वाचित Sikyong यानी राजनीतिक प्रमुख रहे हैं. यह संस्था भारत के धर्मशाला से काम करती है और निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों का प्रतिनिधित्व करती है. फिलहाल Sangay Harvard Law School के East Asian Legal Studies कार्यक्रम में वरिष्ठ विजिटिंग फेलो हैं. चीन की तिब्बत नीति के लंबे समय से आलोचक रहे Sangay की इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि को उनके बयानों के संदर्भ में भी देखा जाता है.