सहरसा: बिहार के सहरसा की 12 साल की वैष्णवी आनंद ने अपने जन्मदिन पर ऐसा फैसला लिया, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया. वैष्णवी पिछले छह महीने से अपनी गुल्लक में पैसे जमा कर रही थी. उसका सपना था कि जन्मदिन पर गुल्लक फोड़कर जमा रकम अपनी पसंद की चीजों पर खर्च करेगी. लेकिन नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ की तस्वीरों ने उसकी सोच बदल दी.
26 अगस्त को नेपाल में आई बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पानी का तेज बहाव, डूबे हुए इलाके और अपने घर तथा सामान को बचाने की कोशिश करते लोग दिखाई दे रहे थे. इन तस्वीरों ने 12 साल की वैष्णवी को भी परेशान कर दिया. उसने महसूस किया कि जहां वह अपने जन्मदिन पर अपनी पसंद की चीजें खरीदने के बारे में सोच रही है, वहीं नेपाल में कई परिवार मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं.
यही सोच वैष्णवी के फैसले की वजह बनी. उसने तय किया कि छह महीने से गुल्लक में जमा किए पैसे अपने ऊपर खर्च करने के बजाय बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दिए जाएंगे. जन्मदिन के दिन उसने अपनी गुल्लक फोड़ी और उसमें जमा रकम नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों को देने का फैसला किया.
शुक्रवार को जन्माष्टमी के दिन ही वैष्णवी का जन्मदिन था. घर में जन्मदिन का माहौल था लेकिन इस बार उसकी खुशी का तरीका अलग था. उसने अपनी छोटी सी बचत जरूरतमंद लोगों के लिए समर्पित कर दी. वैष्णवी का मानना था कि जब दूसरे लोग मुसीबत में हैं, तो अपने ऊपर पैसे खर्च करने से बेहतर है कि किसी जरूरतमंद की मदद की जाए.
वैष्णवी के इस फैसले की जानकारी जब मधेपुरा के जेडीयू सांसद दिनेश चंद्र यादव को मिली तो वह बच्ची से मिलने उसके घर पहुंचे. सांसद ने वैष्णवी को जन्मदिन की बधाई दी और उसके फैसले की सराहना की. उन्होंने अपनी ओर से भी बच्ची की गुल्लक में कुछ पैसे डाले. सांसद ने कहा कि वैष्णवी ने अपना जन्मदिन मनाने के बजाय गुल्लक में जमा रकम नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए देने का फैसला किया है. उन्होंने बच्ची के इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया.
वैष्णवी की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उसने कोई बड़ी रकम दान नहीं की, बल्कि अपनी उम्र और अपनी इच्छाओं के हिसाब से जमा की गई छोटी सी बचत जरूरतमंदों के नाम कर दी. छह महीने तक जिस गुल्लक को उसने अपने जन्मदिन के सपनों के लिए भरा था, वही गुल्लक आखिरकार किसी और की मदद का जरिया बन गई.
बच्ची का यह कदम बताता है कि मदद करने के लिए उम्र या बड़ी संपत्ति जरूरी नहीं होती. संवेदनशील सोच और दूसरों के दर्द को समझने का जज्बा ही सबसे बड़ी चीज है. वैष्णवी ने अपने जन्मदिन पर अपनी खुशी को किसी और की उम्मीद से जोड़ दिया. यही वजह है कि उसकी छोटी सी गुल्लक की कहानी अब बड़ी मिसाल बन गई है.