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India Daily

'हमें NATO की कोई जरूरत नहीं...', सहयोगियों के पीछे हटने पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप

NATO और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं. अमेरिका को अब नाटो देशों की मदद की न तो कोई जरूरत है और न ही इच्छा...

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
'हमें NATO की कोई जरूरत नहीं...', सहयोगियों के पीछे हटने पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप
Courtesy: X

पश्चिमी एशिया में भड़के युद्ध के बीच अमेरिका और उसके वैश्विक सहयोगियों में बड़ी दरार खुलकर सामने आ गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य मदद भेजने से जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य नाटो देशों के इनकार के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने मंगलवार को दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि अमेरिका को अब नाटो देशों की मदद की न तो कोई जरूरत है और न ही इच्छा.

ट्रंप ने किया पोस्ट

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने नाटो गठबंधन को एक एकतरफा रास्ता करार दिया. उनका आरोप है कि वाशिंगटन अपने सहयोगियों की रक्षा पर बेहिसाब पैसा खर्च करता है, लेकिन मुश्किल वक्त में उसे अकेला छोड़ दिया जाता है. ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, "हमें जो अभूतपूर्व सैन्य सफलता मिली है, उसे देखते हुए हमें अब नाटो देशों की मदद की कतई जरूरत नहीं है. सच तो यह है कि हमें कभी उनकी जरूरत थी ही नहीं! जापान, ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण कोरिया की भी नहीं. अमेरिका के राष्ट्रपति के नाते मैं साफ कर दूं कि हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश हैं और हमें किसी की मदद नहीं चाहिए."

युद्ध का नया केंद्र

यह भू-राजनीतिक भूचाल ऐसे समय आया है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले के बाद, ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है. होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है, और दुबई व अबू धाबी जैसे अहम ठिकानों से भी धमाकों की खबरें हैं.

तेल निर्यात का सबसे अहम समुद्री रूट

होर्मुज दुनिया के लगभग एक-चौथाई LNG और तेल निर्यात का सबसे अहम समुद्री रूट है. इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि यह जलमार्ग आम व्यापार के लिए खुला है, लेकिन "हम पर हमला करने वाले दुश्मनों और उनके टैंकरों के लिए यह पूरी तरह बंद है."

सहयोगियों ने किया किनारा

इससे पहले ट्रंप ने इस अहम जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए सहयोगी देशों से तेजी और उत्साह के साथ जुड़ने की अपील की थी और चेतावनी भी दी थी, लेकिन सहयोगियों का रुख बेहद स्पष्ट और निराशाजनक रहा:

  • जापान और ऑस्ट्रेलिया ने फारसी खाड़ी में अपने नौसैनिक जहाज भेजने से साफ इनकार कर दिया है.
  • जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने भी एक इंटरव्यू में दो टूक कहा, "क्या हम इस युद्ध का सक्रिय हिस्सा बनेंगे? बिल्कुल नहीं.
  • ब्रिटेन समेत अन्य सहयोगियों की तरफ से भी कोई ठोस सैन्य समर्थन नहीं मिला है.