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India Daily

'अच्छा हुआ वो चला गया...', अमेरिका के एंटी-टेरर सलाहकार के इस्तीफे पर राष्ट्रपति ट्रंप का पलटवार; बोले- ईरान सबके लिए खतरा

अमेरिका के शीर्ष एंटी-टेरर सलाहकार जो केंट के इस्तीफे पर ट्रंप ने अपना बयान जारी कर दिया...

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
'अच्छा हुआ वो चला गया...', अमेरिका के एंटी-टेरर सलाहकार के इस्तीफे पर राष्ट्रपति ट्रंप का पलटवार; बोले- ईरान सबके लिए खतरा
Courtesy: X

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बीच व्हाइट हाउस के भीतर एक बड़ा कूटनीतिक भूचाल आ गया है. ईरान के साथ युद्ध की नीतियों को लेकर अमेरिका के शीर्ष एंटी-टेरर सलाहकार जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी और बेबाक प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अच्छी बात है कि वह चला गया.

'सुरक्षा के मामले में कमजोर थे केंट': ट्रंप

मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने जो केंट पर सीधा हमला बोला और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर 'बेहद कमजोर' करार दिया. ट्रंप ने कहा, "मैं हमेशा उन्हें एक अच्छा इंसान मानता था, लेकिन मुझे हमेशा से यह भी लगता था कि सुरक्षा के मामले में उनका रवैया ढीला है. जब मैंने उनका बयान पढ़ा, तो मुझे एहसास हुआ कि उनका जाना ही हमारे लिए बेहतर है, क्योंकि उनका मानना था कि ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं है." ट्रंप ने जोर देकर कहा, "पूरी दुनिया जानती है कि ईरान कितना बड़ा खतरा था; असली सवाल सिर्फ यह था कि क्या कोई देश इसके खिलाफ कड़ा कदम उठाना चाहता था या नहीं."

व्हाइट हाउस का पलटवार

जो केंट ने अपने इस्तीफे वाले लेटर में दावा किया था कि अमेरिका को ईरान से कोई तुरंत खतरा नहीं था. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने केंट के इन दावों को पूरी तरह से 'गलत और बेबुनियाद' बताया है.

लेविट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट में लिखा, "यह वही झूठा नैरेटिव है जिसे डेमोक्रेट्स और कुछ लिबरल मीडिया हाउस लगातार चला रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से बताया है कि उनके पास इस बात के पुख्ता और मजबूत सबूत थे कि ईरान अमेरिका पर पहला हमला करने की पूरी तैयारी में था."

दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला सबसे बड़ा देश

लेविट ने ईरान को दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला सबसे बड़ा देश बताते हुए कहा, ईरानी शासन बुरा है. उसने गर्व से अमेरिकियों की जान ली है और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने तक खुलेआम हमारे देश को धमकियां दीं. राष्ट्रपति बिना किसी ठोस आधार के मिलिट्री ताकत का इस्तेमाल नहीं करते."

कमांडर-इन-चीफ तय करते हैं खतरा

प्रेस सेक्रेटरी ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के तहत देश के दुश्मनों और संभावित खतरों का आकलन करने का सर्वोच्च अधिकार केवल कमांडर-इन-चीफ यानी राष्ट्रपति के पास है, क्योंकि अमेरिकी जनता ने उन्हें वोट देकर यह जिम्मेदारी सौंपी है. उन्होंने उन आरोपों को भी अपमानजनक और हास्यास्पद कहकर खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ट्रंप ने युद्ध का फैसला किसी विदेशी प्रभाव में आकर लिया है.