नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बीते दिनों हुई घटनाओं को लेकर एक गोपनीय दस्तावेज चर्चा का विषय बन गया है. इस दस्तावेज में वहां चल रहे विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े कई गंभीर दावे किए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक संकट, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुए आंदोलन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए. दस्तावेज में नागरिकों की मौत, अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और संचार सेवाओं पर रोक जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लंबे समय से लोग आर्थिक कठिनाइयों, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े प्रदर्शनकारी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे. समय के साथ यह आंदोलन स्थानीय प्रशासन और सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष का रूप लेने लगा.
दस्तावेज में दावा किया गया है कि 5 जून से 9 जून के बीच चलाए गए सुरक्षा अभियान के दौरान व्यापक स्तर पर बल प्रयोग हुआ. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई नागरिक इस कार्रवाई की चपेट में आए. इसमें महिलाओं और बच्चों के हताहत होने के भी आरोप लगाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान 26 लोग मारे गए हैं, जिनमें 7 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने मानवाधिकारों को लेकर बहस तेज कर दी है.
गोपनीय दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि हालात नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को क्षेत्र में भेजा गया. आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय अपनाए गए. वहीं पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और हिंसक गतिविधियों को रोकने के लिए यह कदम आवश्यक था.
रिपोर्ट में इंटरनेट और अन्य संचार सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र किया गया है. आरोप है कि कार्रवाई से जुड़ी तस्वीरें और सूचनाएं बाहर न जा सकें, इसके लिए कई क्षेत्रों में संचार व्यवस्था प्रभावित की गई. दूसरी ओर अधिकारियों का तर्क है कि यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया था. इस मुद्दे पर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं.
PoK में जारी घटनाक्रम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है. विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय के कुछ समूहों ने भी विरोध प्रदर्शन किए हैं. वहीं भारत ने पाकिस्तान पर भ्रामक सूचनाएं फैलाने का आरोप लगाया है और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई है. इस बीच विभिन्न पक्षों की ओर से स्वतंत्र जांच और शांतिपूर्ण समाधान की मांग भी उठ रही है.