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चीन की ओर झुका, भारत को कोसा, फिर भी मालदीव को मोदी ने क्यों भेजा न्योता? समझिए क्या है वजह

India Maldives Row: रविवार को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार शपथ ले ली. शपथ ग्रहण समारोह में भारत की विदेश नीति का एक अहम नजारा देखने को मिला.इस समारोह में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल हुए जो पूरी दुनिया के लिए बड़ा कूटनीतिक संदेश था. 

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Pm modi and Muizzu
Courtesy: Social Media

India Maldives Row: हिंद महासागर में चीन का दखल किस कदर बढ़ता जा रहा है यह किसी से छिपा नहीं है. श्रीलंका से लेकर मालदीव तक सभी छोटे देशों को वह अपने मायाजाल में फंसा रहा है. भारत भी चीन के रवैये से भली-भांति परिचित है. यही कारण है कि भारत के प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने जब तीसरी बार शपथ ली तो उन्होंने चीन की चाल को कमजोर करने का दांव चला.शपथ ग्रहण के दिन पीएम ने पड़ोसियों को बुलाकर चीन को आईना दिखा दिया. 

मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश को बुलाकर पूरी दुनिया को एक बड़ा कूटनीतिक संदेश दे दिया. भारत ने अपने पड़ोसियों को बुलाकर यह बता दिया कि उसकी दशकों पुरानी पड़ोसी प्रथम नीति में कोई बदलाव नहीं आया है. जानकार पीएम मोदी के इस दांव को हिंद महासागर में चीनी प्रभाव को रोकने की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं. 

चीन की पड़ोसियों पर नजर 

बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के 7 पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल हुए. पीएम के तीसरे शपथ ग्रहण समारोह में भूटान, नेपाल, सेशेल्स, मॉरीशस, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव ने हिस्सा लिया. इन देशों में पांच देश हिंद महासागर क्षेत्र के हैं. हिंद महासागर के ये देश भारत की समुद्री नीति के लिहाज से बेहद अहमियत रखते हैं.चीन काफी समय से भारत के पड़ोसियों पर नजर रखे हुआ है, चाहें वह श्रीलंका हो या मालदीव. 

पड़ोसियों के साथ संबंधों में गिरावट 

कूटनीतिक और सामरिक मामलों के जानकारों का मानना है कि पीएम के इस प्रयास का मतलब पड़ोसियों को साधना था. पीएम मोदी चाहते हैं कि भारत के पड़ोसी देशों मालदीव, श्रीलंका की ओर चीन का झुकाव अधिक न हो.  बीते कुछ समय में देखा गया है कि नेपाल, श्रीलंका, मालदीव चीन से काफी ज्यादा प्रभावित हुए हैं. चीन ने श्रीलंका और मालदीव को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया है. चीन के कारण ही भारत की नेपाल के साथ संबंधों में तल्खी आई और इसी वजह से मालदीव के साथ तनाव में वृद्धि भी हुई. 

पीएम मोदी ने खींच दी लकीर 

हालांकि भारतीय प्रयासों के कारण इन देशों के साथ भारत के रिश्ते ट्रैक पर आने शुरु हो गए हैं. चीन इन देशों पर प्रभाव बढ़ाकर हिंद महासागर के क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है. इसके अलावा उसकी कोशिश है कि वह इन देशों के माध्यम से भारत को चारों ओर से घेर ले. यही कारण है कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ रिश्तों को बेहतर करके चीन से दूर करने का प्रयास कर रहा है. भारत समुद्री सुरक्षा को लेकर बहुत सजग है. हिंद महासागर के हितधारकों को शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बनाकर पीएम मोदी ने दूर की लकीर खींची है.