Indus Waters Treaty: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC की जुलाई महीने की अध्यक्षता कर रहे पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बहस के दौरान कश्मीर मुद्दे और भारत के साथ चल रहे सिंधु जल संधि विवाद को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विवादित क्षेत्र बताया और कश्मीरियों के आत्म-निर्णय के अधिकार की वकालत की.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डार ने कहा कि इसका अंतिम समाधान संबंधित सुरक्षा परिषद प्रस्तावों और कश्मीरी जनता की इच्छा के अनुसार होना चाहिए क्योंकि यह जम्मू और कश्मीर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में सबसे पुराने विवादों में से एक है. भारत की ओर से किए जा रहे ‘सजावटी उपाय’ आत्म-निर्णय के मौलिक और अटूट अधिकार का स्थान नहीं ले सकते.
कश्मीर मुद्दे के साथ-साथ, डार ने भारत-पाकिस्तान के बीच 65 वर्षों से लागू सिंधु जल संधि पर भी चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को एकतरफा और अवैध तरीके से निलंबित कर दिया है.
डार ने कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि इस बात का उदाहरण है कि कैसे संवाद और कूटनीति से दो पड़ोसी देश जल साझेदारी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर शांतिपूर्ण समाधान निकाल सकते हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत ने इस संधि को एकतरफा निलंबित करके पाकिस्तान के 240 मिलियन लोगों के जीवन और आजीविका को संकट में डाल दिया है.”
भारत सरकार की ओर से डार के इन बयानों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की उम्मीद है. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र में उठाए जाने वाले प्रमुख प्रस्तावों का कड़ा विरोध करने की योजना बना चुका है.
इस्लामाबाद संयुक्त राष्ट्र में इस्लामिक सहयोग संगठन यानी OIC की भूमिका को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है. OIC की 57 सदस्य राष्ट्रों में से कई ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत की आलोचना की है. पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र और OIC के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने की कोशिश में है, जिसे लेकर भारत ने पहले ही असहमति जताई है.