सीमा पार सुरक्षा गतिविधियों को लेकर एक अहम खुलासा सामने आया है. हाल ही में हुई मुठभेड़ों के बाद पाकिस्तान ने अपने आतंकवादी लॉन्चपैड सीमा से दूर अंदरूनी इलाकों में खिसकाए हैं. इस बीच बीएसएफ का कहना है कि वह हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और यदि केंद्र सरकार अनुमति देती है, तो ऑपरेशन सिंदूर की तरह फिर से बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने में सक्षम है. बीएसएफ अधिकारियों ने बताया कि सीमा पर अभी अस्थायी शांति है, लेकिन सतर्कता का स्तर पहले जैसा ही बरकरार है.
बीएसएफ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल विक्रम कुवार के अनुसार, पाकिस्तान ने सियालकोट और जफरवाल क्षेत्र में 12 सक्रिय लॉन्चपैड स्थापित किए हैं, जो अब सीधे सीमा पर नहीं हैं. इसके अलावा करीब 60 लॉन्चपैड और भी अंदरूनी इलाकों में काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि ये ठिकाने लगातार बदलते रहते हैं और इन्हें स्थायी तौर पर नहीं रखा जाता. बीएसएफ सभी गतिविधियों पर नजर रखते हुए सरकार के निर्देशों का इंतजार कर रही है.
बीएसएफ के आईजी शशांक आनंद ने कहा कि बल पारंपरिक और हाइब्रिड—दोनों तरह के युद्ध के लिए प्रशिक्षित और सक्षम है. उन्होंने करगिल युद्ध और मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए बताया कि यदि आदेश मिला, तो बीएसएफ पहले से भी अधिक नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती है. उनके मुताबिक, बल की तैयारी हर समय पूरी रहती है और किसी भी खतरे का जवाब देने में देर नहीं लगेगी.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बीएसएफ ने पाकिस्तानी रेंजरों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी है. बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, अब तक सीमा पार किसी भी तरह की आतंकी मूवमेंट के संकेत नहीं मिले हैं. आईजी आनंद ने कहा कि मई की कार्रवाई के नुकसान से उबरने में पाकिस्तानी रेंजरों को समय लगा, और इस दौरान उनकी हर गतिविधि पर भारतीय पक्ष नजर रखे हुए है. सतर्कता और निगरानी फिलहाल उच्च स्तर पर जारी है.