नई दिल्ली: पाकिस्तान एक बार फिर अपने पुराने छल कपट वाले तरीको के कारण सुर्खियों में है. इस बार मामला ऑक्सफोर्ड यूनियन डिबेट का है, जहां पाकिस्तान ने एक सुनियोजित नाटक रचकर भारत के खिलाफ डिबेट जीतने का प्रचार शुरू कर दिया. लेकिन भारतीय पक्ष की ओर से सामने आए तथ्यो ने स्पष्ट कर दिया कि यह पूरी कवायद भारत को बदनाम करने की एक सोची समझी कोशिश थी.
डिबेट का प्रस्ताव था, 'भारत की पाकिस्तान नीति एक पॉपुलिस्ट रणनीति है जिसे सुरक्षा नीति के रूप में पेश किया जाता है.' भारतीय प्रतिभागियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया शुरू से ही गड़बड़ और संदिग्ध थी, जिसकी योजना ऑक्सफोर्ड यूनियन के पाकिस्तानी मूल के अध्यक्ष मूसा हराज ने बनाई, जो खुद पाकिस्तान के फेडरल डिफेन्स प्रोडक्शन मिनिस्टर के बेटे हैं.
सूत्र बताते हैं कि डिबेट को एक इंडिया-पाकिस्तान बहस का रूप देने की कोशिश कई महीनो पहले शुरू की गई थी. भारतीय वक्ताओं को निमंत्रण तो भेजा गया, लेकिन आयोजन से ठीक पहले सब कुछ रहस्यमयी ढंग से बदलता गया.
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुवेदी ने कहा कि जून में निमंत्रण स्वीकार करने के बाद उन्हें पांच महीने तक कोई जवाब नहीं मिला. तय तारीख से सिर्फ दो दिन पहले अचानक नया निमंत्रण भेजा गया, जो किसी भी सांसद के लिए असंभव था.
वहीं, लेखक वकील जे साई दीपक ने बताया कि उन्हें कन्फर्म कर दिया गया था और बताया गया था कि भारत की ओर से जनरल एमएम नरवणे (रि.) और सुब्रमण्यम स्वामी भी शामिल होंगे. लेकिन न तो आयोजन साफ था, न जानकारी पूरी.
दीपक के अनुसार, जब वे केस री शेड्यूल कर लंदन पहुंच चुके थे, तभी अचानक बताया गया कि भारतीय वक्ता शॉर्ट नोटिस के कारण नहीं आ रहे. वहीं, पाकिस्तान हाई कमीशन ने तुरंत ट्वीट कर दिया कि तीनो भारतीय स्पीकर्स हट गए हैं. बाद में दीपक को पता चला कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल डिबेट डिनर से घंटो पहले लंदन पहुंचा ही नहीं था, जबकि यूनियन अध्यक्ष मूसा हराज सुबह से यह जानते थे, लेकिन जानबूझकर छिपाते रहे. शाम तक हराज ने फोन कर माफी मांगी, लेकिन तब तक पाकिस्तान अपना प्रोपेगेंडा फैला चुका था.
विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान जानता था कि अगर वास्तविक बहस होती, तो भारतीय स्पीकर्स दशकों से चले आ रहे पाकिस्तान पोषित आतंकवाद की पूरी कहानी दुनिया के सामने रख देते. यह वही पैटर्न है, जैसा पाकिस्तान ने सिंधु ऑपरेशन के बाद भी अपनाया था, हार के बावजूद जीत का झूठा दावा.
घटनाओं की टाइमलाइन साफ बताती है कि बहस कराने का इरादा ही नहीं था. पाकिस्तान की रणनीति सरल थी, भारत के न आने का झूठ फैलाओ और जीत का दावा कर दो. भारतीय प्रतिनिधियों का कहना है कि ऑक्सफोर्ड यूनियन जैसी प्रतिष्ठित संस्था का इस्तेमाल एक बार फिर पाकिस्तान की मनोवैज्ञानिक चालों में हो गया.