मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ती जा रही है. ईरान और इजरायल और अमेरिका के बीच लगातार छठे दिन जंग जारी है. अब इस जंग में ईरान की ओर से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अपने सबसे ताकतवर हथियार का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. ईरान के इस खास हथियार का नाम खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल है.
IRGC ने दावा किया कि मिसाइलें तेल अवीव के केंद्र, बेन गुरियन एयरपोर्ट और एयरपोर्ट के पास इजरायली एयर फोर्स बेस पर दागी गईं है. उत्तरी इजरायल में ड्रोन हमलों से एक रडार साइट को भी निशाना बनाया. यह हमला अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के जवाब बताया गया है.
अमेरिका-इजरायल ने शनिवार को ईरान पर कई बड़े हमले किए. मिल रही जानकारी के मुताबिक एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी वॉरशिप को डुबो दिया. जिसके कारण तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया. ईरान अब ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत लगातार हमले कर रहा है. IRGC का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई है.
खोर्रमशहर-4 की खासियत के बारे में बात करें तो यह एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. यह 13 मीटर लंबी है मानों जैसे एक डबल-डेकर बस हो. इसे रॉकेट की तरह ऊपर छोड़ा जाता है, फिर यह घुमावदार रास्ते से लक्ष्य पर तेजी से गिरती है. इसे रोकना बहुत मुश्किल होता है. यह मिसाइल 2017 से ईरान के पास है, लेकिन खोर्रमशहर-4 इसका सबसे नया और एडवांस वर्जन है, जिसे मई 2023 में पेश किया गया था.
ईरान के इस मिसाइल को इसलिए भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि इसकी तीन खासियतें हैं. पहली, इसकी रेंज 2,000 किलोमीटर तक है. अगर उदाहरण के तौर पर समझे तो पटना से दिल्ली की दूरी का लगभग दोगुना है. इसलिए दूर के लक्ष्यों को यह आसानी से मार गिरा सकती है. दूसरी खासियत इसका वॉरहेड 1,500 किलोग्राम तक है, यह एक छोटी कार जितना वजन है. जो की पूरा एक्सप्लोसिव से भरा होता है. अगर यह एयरपोर्ट या बेस पर गिरता तो भारी तबाही हो सकती है.
तीसरी, न्यूक्लियर वॉरहेड लगाने की क्षमता. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इसका डिजाइन ऐसा है कि वॉर हेड अलग से लगाया जा सकता है. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई है. पुरानी मिसाइलों को जाम करके भटकाया जा सकता है. लेकिन खोर्रमशहर-4 में मिड-फेज नेविगेशन सिस्टम है. जो आसमान में रहते हुए रास्ते ठीक कर लेती है और जामिंग का असर कम होता है. इसे लॉन्च करने में केवल 12 मिनट लगते हैं.