नई दिल्ली: पिछले 30 दिनों में अमेरिका-ईरान टकराव ने हालात को उस स्तर तक पहुंचा दिया है, जहां युद्ध सिर्फ सीमाओं तक नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय नीति और क्षेत्रीय संतुलन को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है. 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हमले के बाद शुरू हुई यह जंग कई मोर्चों पर फैल चुकी है. ईरान के जवाबी मिसाइल हमले, हिजबुल्लाह की सक्रियता और लेबनान में जमीनी युद्ध ने संकट को और बढ़ा दिया है. दुनिया अब भी किसी निर्णायक समाधान का इंतजार कर रही है.
अमेरिका और इजरायल ने 'एपिक फ्यूरी/रोरिंग लायन' नामक संयुक्त अभियान के अंतर्गत ईरान के मिसाइल ठिकानों और कमांड सेंटरों पर एक साथ बड़े हमले किए. ईरान के कई वरिष्ठ नेता मारे गए, जिससे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई भी शामिल हैं. इसके बाद पूरे क्षेत्र में हलचल फैल गई. जवाब में ईरान ने 170 से अधिक मिसाइलें इजरायल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर दाग दीं. इस दिन से युद्ध पूरी तरह खुल गया और सभी पक्षों ने अपने-अपने मोर्चे सक्रिय कर दिए.
1 मार्च से ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए, जिनका लक्ष्य इजरायल के बीत शेमेश, जेरूसलम और खाड़ी देशों के अमेरिकी ठिकाने थे. इजरायल ने भी तुरंत जवाब दिया और लेबनान में हिजबुल्लाह की गतिविधियों को रोकने के लिए हमले बढ़ाए. गाजा में राहत मार्ग भी बंद कर दिए गए. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि यह संघर्ष कई हफ्ते चल सकता है, हालांकि उन्होंने दावा किया कि ईरान की क्षमता लगातार घट रही है.
2 से 7 मार्च के बीच हिजबुल्लाह ने इजरायल के हाइफा, मेरॉन बेस और तेल अवीव तक मिसाइलें दागीं. इजरायल ने बेरूत और दक्षिण लेबनान पर भारी बमबारी की, जिससे सैन्य ठिकाने, ऊंची इमारतें और संचार केंद्र नष्ट हो गए. सफेद फॉस्फोरस उपयोग की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ाई. इस दौरान लेबनान के कई गांव खाली कराए गए, और जमीनी स्तर पर लड़ाई तेज हो गई.
8 से 16 मार्च के बीच इजरायल ने दक्षिण लेबनान में अपनी जमीनी उपस्थिति बढ़ाई. हिजबुल्लाह ने बार-बार रॉकेट, क्लस्टर बम और ड्रोन से जवाब दिया. इजरायल के कई सैनिक घायल हुए और कई गांवों में नागरिक जीवन ठप पड़ गया. संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना के कैंप पर हमला होने से स्थिति और गंभीर हुई. गाजा में भी छिटपुट झड़पें जारी रहीं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ी.
19 और 20 मार्च को ईरान ने इजरायल पर लगातार दो दिनों तक मिसाइल बैराज दागे, जिनमें क्लस्टर मुनिशन का व्यापक इस्तेमाल देखा गया. जेरूसलम, रेहोवोत और बीत शेमेश में अलर्ट रहा और कुछ हिस्सों में नुकसान भी हुआ. इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हिजबुल्लाह पर केंद्रित बड़ी एयरस्ट्राइक्स कीं. इसी बीच ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्यों के करीब है और जल्द अभियान में कमी करने पर विचार करेगा.
20 से 26 मार्च के दौरान इजरायल ने लेबनान में पुलों और रणनीतिक मार्गों को निशाना बनाकर हिजबुल्लाह की सप्लाई लाइन तोड़ने की कोशिश की. हिजबुल्लाह ने भी मोर्टार और रॉकेट हमलों से इजरायल को बड़ा जवाब दिया. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौते के लिए तैयार है, जबकि ईरान ने कहा कि सीजफायर तभी होगा जब लेबनान में लड़ाई रुकेगी. स्थिति इतनी उलझ गई कि लेबनान ने ईरानी राजदूत को निष्कासित करने तक का निर्णय लिया.
युद्ध के 29 मार्च तक पहुंचते-पहुंचते अमेरिका ने क्षेत्र में 3500 से अधिक सैनिकों की अतिरिक्त तैनाती कर दी. लेबनान में इजरायल आगे बढ़ रहा है और हिजबुल्लाह लगातार रॉकेट बरसा रहा है. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जमीनी कार्रवाई करता है, तो उसके सैनिक 'ताबूतों में लौटेंगे.' अभी भी किसी भी पक्ष ने पीछे हटने का संकेत नहीं दिया है, और पश्चिम एशिया एक बड़े अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ता दिख रहा है.