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India Daily

'पहलगाम हमले से बढ़ी पाकिस्तान की हैसियत', US-ईरान वार्ता के बीच लश्कर कमांडर का जहरीला कबूलनामा

लश्कर कमांडर अबू मूसा कश्मीरी के खुलासे ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है. पहलगाम हमले को कूटनीतिक जीत बताना इस्लामाबाद शांति वार्ता पर सवाल उठाता है. इससे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख को गहरा धक्का लगा है.

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'पहलगाम हमले से बढ़ी पाकिस्तान की हैसियत', US-ईरान वार्ता के बीच लश्कर कमांडर का जहरीला कबूलनामा
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली:  कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 मासूमों की जान चली गई थी, जिसने पूरी दुनिया को गमगीन कर दिया था. अब लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर अबू मूसा कश्मीरी ने दावा किया है कि इस हमले ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूती दी है. उसने बेशर्मी से कहा कि इसी हमले के कारण पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर वह महत्व मिला, जिससे उसे अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का मौका मिला. यह बयान पाकिस्तान की नीयत को संदिग्ध बनाता है.

अबू मूसा कश्मीरी का यह कबूलनामा रोंगटे खड़े करने वाला है क्योंकि वह निर्दोष लोगों की मौत को पाकिस्तान के लिए फायदेमंद मान रहा है. उसके अनुसार, पहलगाम हमले के बाद ही पाकिस्तान को वह स्थिति हासिल हुई कि वह बड़े देशों के बीच मध्यस्थ बन सके. यह सोचना ही भयानक है कि कैसे एक आतंकी संगठन अपनी हिंसक गतिविधियों को किसी देश की कूटनीतिक बढ़त का जरिया बता रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान की खतरनाक सोच का हिस्सा है.

शांति वार्ता की मेज पर अविश्वास का साया

यह विवादित बयान ऐसे समय आया है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति वार्ता चल रही है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधि क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश में जुटे हैं. हालांकि, आतंकी कमांडर के इस दावे ने वार्ता की विश्वसनीयता पर पानी फेर दिया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब यह सवाल पूछ रहा है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में शांति चाहता है या वह आतंक का लाभ उठा रहा है.

पाकिस्तान की दोहरी नीति का पर्दाफाश

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद का शिकार बताता आया है, लेकिन अबू मूसा जैसे कमांडर के बयान सच्चाई बयां कर रहे हैं . एक तरफ शांति की दुहाई देना और दूसरी तरफ आतंकियों को कूटनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल करना पाकिस्तान की पुरानी चाल रही है. इस खुलासे ने साबित कर दिया है कि वहां आतंक को सरकारी तंत्र का मूक समर्थन प्राप्त है. यह दोहरी नीति न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा है.

भारत-पाक संबंधों में बढ़ा तनाव

पहलगाम में 26 लोगों की हत्या का घाव अभी भरा भी नहीं था कि इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. भारत ने हमेशा यह तर्क दिया है कि पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए कर रहा है. लश्कर कमांडर का यह सार्वजनिक दावा भारत के रुख की पुष्टि करता है. इस घटनाक्रम के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की जवाबदेही तय करने और उस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग को और तेज कर सकता है.

वैश्विक साख और विश्वसनीयता पर संकट

किसी भी राष्ट्र की विश्वसनीयता उसकी नीतियों की ईमानदारी पर टिकी होती है. यदि पाकिस्तान आतंकियों के जरिए अपनी विदेश नीति को प्रभावित कर रहा है, तो दुनिया का उस पर से भरोसा उठना लाजमी है. इस्लामाबाद वार्ता के बीच इस खुलासे ने पाकिस्तान को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है. अब पूरी दुनिया यह देख रही है कि क्या पाकिस्तान इन दावों को सिरे से खारिज कर आतंकियों पर सख्त कार्रवाई करेगा या हमेशा की तरह चुप्पी साधे रहेगा.