अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक हलचल सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा ईरान की जमी हुई संपत्ति को जारी करने पर सहमति जताई है. यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है, जब इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अहम बातचीत जारी है. इस फैसले को संभावित समझौते की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
ईरान के एक वरिष्ठ सूत्र ने दावा किया है कि अमेरिका ने कतर समेत कुछ अन्य विदेशी बैंकों में फंसी ईरानी संपत्तियों को जारी करने पर सहमति जताई है. हालांकि इस पर अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है. सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला इस्लामाबाद में चल रही बातचीत के दौरान हुआ है, जहां दोनों पक्ष कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं. यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले कई वर्षों से इन संपत्तियों को लेकर दोनों देशों के बीच खींचतान बनी हुई थी.
सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि इन संपत्तियों को जारी करने का फैसला सीधे तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने से जुड़ा हुआ है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए प्राथमिकता है. माना जा रहा है कि वार्ता में यह मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया है और इसी के मद्देनजर यह समझौता आकार ले रहा है.
एक अन्य ईरानी सूत्र के अनुसार, अमेरिका ने लगभग 6 अरब डॉलर की राशि जारी करने पर सहमति दी है, जो कतर के बैंकों में जमा है. यह राशि मूल रूप से 2018 में फ्रीज की गई थी और 2023 में कैदी अदला-बदली समझौते के तहत जारी की जानी थी. हालांकि, बाद में इजराइल पर हमास के हमले के बाद इसे फिर से रोक दिया गया था. इस फंड का उपयोग केवल मानवीय जरूरतों जैसे भोजन, दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों के लिए ही किया जा सकता है.
यह पूरी प्रक्रिया अमेरिका और ईरान के बीच जटिल रिश्तों की कहानी भी बयान करती है. 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा परमाणु समझौते से हटने के बाद से हालात और बिगड़ गए थे. बाद में 2023 में कतर की मध्यस्थता से कैदी अदला-बदली का समझौता हुआ, जिसमें इस फंड को कतर में ट्रांसफर किया गया. अब ताजा घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश एक बार फिर बातचीत के जरिए रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को भी मजबूती मिल सकती है.