दुनिया भर के औद्योगिक संयंत्र हर दिन बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) वातावरण में छोड़ते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन की चुनौती बढ़ रही है. अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो फैक्ट्रियों से निकलने वाली गैस में मौजूद CO₂ को बिना अलग किए सीधे उपयोगी रासायनिक पदार्थ में बदल सकती है. प्रतिष्ठित जर्नल Nature में प्रकाशित इस शोध को औद्योगिक प्रदूषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
अब तक CO₂ का उपयोग करने से पहले उसे अन्य गैसों जैसे ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से अलग करना पड़ता था, जिससे प्रक्रिया महंगी और जटिल हो जाती थी. शोधकर्ताओं ने इस समस्या का समाधान विशेष प्रकार के ऑर्गेनिक इलेक्ट्रोलाइट्स विकसित करके किया. इन इलेक्ट्रोलाइट्स में हाइड्रोजन बॉन्डिंग को कमजोर किया गया, जिससे अवांछित रासायनिक प्रतिक्रियाएं कम हुईं और कार्बन डाइऑक्साइड को उपयोगी उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन गई.
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि यह प्रणाली तब भी प्रभावी रही, जब गैस मिश्रण में केवल 1 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद थी. इसके बाद इसे औद्योगिक धुएं जैसी परिस्थितियों में 100 घंटे से अधिक समय तक लगातार चलाया गया. इस दौरान 15 प्रतिशत CO₂ और 8 प्रतिशत ऑक्सीजन वाले गैस मिश्रण को लगभग पूरी दक्षता के साथ कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) में बदला गया, जो सिंथेटिक ईंधन और कई रासायनिक उत्पादों के निर्माण में अहम कच्चा माल है.
शोधकर्ताओं के अनुसार यह तकनीक स्टील, सीमेंट, एल्यूमिना, रसायन और ऊर्जा उत्पादन जैसे उन उद्योगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह रोकना मुश्किल है. फैक्ट्री से निकलने वाली गैस को सीधे उपयोग में लाने से शुद्धिकरण की लागत घटेगी और कार्बन उपयोग (Carbon Utilisation) अधिक व्यावहारिक एवं किफायती बन सकेगा.
वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को उच्च दक्षता वाले सोलर सेल के साथ भी जोड़कर परीक्षण किया. इस एकीकृत प्रणाली ने लगभग 5.5 प्रतिशत सोलर-टू-फ्यूल एफिशिएंसी हासिल की, जिससे यह संकेत मिला कि भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा की मदद से भी औद्योगिक CO₂ को उपयोगी ईंधन और रसायनों में बदला जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ स्वच्छ औद्योगिक उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.