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India Daily

IRGC विवाद के बाद ईरान का कड़ा जवाब, यूरोपीय संघ की नौसेना और वायु सेना को घोषित किया 'आतंकवादी संगठन'

ईरान ने यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों की नेवी और एयर फोर्स को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है. यह कदम EU के IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करने के जवाब में उठाया गया है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
IRGC विवाद के बाद ईरान का कड़ा जवाब, यूरोपीय संघ की नौसेना और वायु सेना को घोषित किया 'आतंकवादी संगठन'
Courtesy: @khamenei_ir X account

नई दिल्ली: ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों की नेवी और एयर फोर्स को टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन घोषित किया है. यह कदम EU द्वारा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन घोषित करने के जवाब में उठाया गया, जिसे ईरान ने 'गैर-कानूनी और गलत' बताया है.

शनिवार को जारी एक ऑफिशियल बयान में ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला 2019 में पास हुए IRGC को अमेरिका द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित करने के जवाब में आपसी कार्रवाई कानून के आर्टिकल 7 के तहत लिया गया.

इस कानून में क्या है?

इस कानून के मुताबिक कोई भी देश या ग्रुप जो अमेरिका के फैसले का समर्थन करता है या उसे मानता है, उस पर आपसी कार्रवाई की जाएगी. मंत्रालय ने EU के फैसले को UN चार्टर और इंटरनेशनल कानून के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ बताया और IRGC को ईरान की ऑफिशियल आर्म्ड फोर्स का हिस्सा बताया.

बयान में साफ किया गया कि EU के सदस्य देशों की सभी नेवी और एयर फोर्स इस कानून के तहत आती हैं और उन्हें आपसी लेन-देन के सिद्धांत के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया जा रहा है.

कब उठाया गया यह कदम?

यह डेवलपमेंट 19 फरवरी 2026 को IRGC को अपनी आतंकवादी लिस्ट में जोड़ने के EU काउंसिल के फैसले से पहले का कदम है. कहा जा रहा है कि EU का यह कदम ईरान में हाल के विरोध प्रदर्शनों के कथित दमन और दूसरे मुद्दों से जुड़ा है. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद बना IRGC, ईरान की इकॉनमी, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और न्यूक्लियर एक्टिविटीज में अहम भूमिका निभाता है.

क्या होगा इस फैसले का असर?

2019 में US के IRGC को टेररिस्ट ऑर्गनाइज़ेशन घोषित करने के बाद ईरान ने पहले भी बदले की कार्रवाई की थी. इस नए फैसले से ईरान-यूरोप रिश्तों में तनाव और बढ़ सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि US, इजराइल और उनके साथी ईरान पर उसके यूरेनियम एनरिचमेंट प्रोग्राम को लेकर दबाव डाल रहे हैं और न्यूक्लियर वेपन बनाने की उसकी क्षमता को लेकर चिंता जता रहे हैं.

ईरान ने इस फैसले को अपनी सॉवरेनिटी और आर्म्ड फोर्सेज की रक्षा के तौर पर पेश किया है, जबकि यूरोपियन पक्ष इसे IRGC की एक्टिविटीज पर रोक लगाने की कोशिश के तौर पर देख रहा है.