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India Daily

भारत को F-35 से पहले खरीदना होगा F-21, अमेरिकी कंपनी के सीईओ ने रख दिया शर्त! क्या होगा मोदी सरकार का अगला कदम?

Rafale Shot Down: लॉकहीड मार्टिन के सीईओ जिम टैक्लेट ने भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर जेट की खरीद से पहले F-21 खरीदने का सुझाव दिया है. यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, टैक्लेट ने 28 मई को बर्नस्टीन के रणनीतिक निर्णय सम्मेलन में कहा कि F-21 भारत के लिए F-35 की दिशा में पहला कदम हो सकता है.

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Edited By: Babli Rautela
भारत को F-35 से पहले खरीदना होगा F-21, अमेरिकी कंपनी के सीईओ ने रख दिया शर्त! क्या होगा मोदी सरकार का अगला कदम?
Courtesy: Social Media

Rafale Shot Down: अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन के सीईओ जिम टैक्लेट ने भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर जेट की खरीद से पहले F-21 खरीदने का सुझाव दिया है. यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, टैक्लेट ने 28 मई को बर्नस्टीन के रणनीतिक निर्णय सम्मेलन में कहा कि F-21 भारत के लिए F-35 की दिशा में पहला कदम हो सकता है. यह बयान भारत-पाकिस्तान तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

टैक्लेट ने बताया कि F-21, जो F-16 का एडवांस वर्जन है, भारत की जरूरतों के लिए तैयार किया गया है. इसमें F-22 और F-35 की तरह एडवांस एवियोनिक्स और तकनीक शामिल हैं. उन्होंने कहा, 'कुछ देश F-21 को F-35 के लिए एक कदम के रूप में देख सकते हैं, जैसे कि भारत.' हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि भारत F-35 के लिए क्यों 'तैयार नहीं' है. F-21 की आपूर्ति श्रृंखला का लगभग आधा हिस्सा F-22 और F-35 के साथ साझा है, जो इसे एक आकर्षक विकल्प बनाता है.

F-35 का अपग्रेडेड वर्जन

लॉकहीड मार्टिन F-35 को और एडवांस करने की योजना बना रहा है. टैक्लेट ने बताया कि नई स्टील्थ कोटिंग्स, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्वायत्तता सॉफ्टवेयर के साथ F-35 को 'पांचवीं पीढ़ी प्लस' बनाया जाएगा. यह अपग्रेड पेंटागन को छठी पीढ़ी के फाइटर जेट के मुकाबले सस्ता विकल्प देगा, क्योंकि लॉकहीड ने बोइंग को NGAD कॉन्ट्रैक्ट में हार का सामना किया था. यह तकनीक भारत जैसे देशों के लिए भी आकर्षक हो सकती है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी 2025 में और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने अप्रैल 2025 में भारत को F-35 की पेशकश की थी. यह प्रस्ताव भारत को NATO सहयोगियों, इजरायल और जापान जैसे देशों की श्रेणी में लाता है. हालांकि, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने कहा कि यह अभी केवल एक प्रस्ताव है और औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है. F-35 की बिक्री कठोर अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों के अधीन है, जिसमें स्टेट डिपार्टमेंट और पेंटागन की मंजूरी जरूरी है.

क्या होगा मोदी सरकार का फैसला

भारतीय वायुसेना (IAF) के पास वर्तमान में 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है. चीन की सैन्य वृद्धि और पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच भारत को अपने वायु बेड़े को आधुनिक बनाने की जरूरत है. F-21 को 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में निर्मित करने का प्रस्ताव है, जिसमें टाटा समूह के साथ साझेदारी शामिल है. लेकिन F-35 की उच्च लागत और रखरखाव की चुनौतियां भारत के लिए चिंता का विषय हैं. विपक्षी दल कांग्रेस ने भी F-35 की कीमत और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं.
 
F-21 और F-35 के बीच फैसला भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है. रूस ने भी Su-57 के स्थानीय उत्पादन की पेशकश की है, जो 'मेक इन इंडिया' के अनुरूप है. लेकिन F-35 की उन्नत तकनीक भारत को चीन के J-20 के मुकाबले बढ़त दे सकती है. दूसरी ओर, F-35 की खरीद भारत को अमेरिका पर निर्भरता बढ़ा सकती है. मोदी सरकार को लागत, तकनीक हस्तांतरण और भू-राजनीतिक गठजोड़ के बीच संतुलन बनाना होगा.