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India Daily

प्रदूषण के मामले में दिल्ली से भी आगे निकला लाहौर, बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर

पाकिस्तान के लाहौर ने दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर का दर्जा हासिल किया है. कराची भी शीर्ष दस में शामिल है. बढ़ते स्मॉग ने स्वास्थ्य, जीवन और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है.

Kanhaiya Kumar Jha
प्रदूषण के मामले में दिल्ली से भी आगे निकला लाहौर, बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर
Courtesy: Gemini AI

नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण गंभीर संकट बनता जा रहा है. स्विस एयर क्वालिटी मॉनिटर IQAir के ताजा आंकड़ों ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है. लाहौर को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है, जबकि कराची भी वैश्विक रैंकिंग में शामिल है. जहरीली हवा, स्मॉग और PM2.5 कणों ने आम लोगों की सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है.

IQAir के अनुसार, लाहौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 452 दर्ज किया गया, जिससे वह दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया. इससे पहले AQI 501 तक पहुंच चुका था, जिसे खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है. कराची भी नौवें स्थान पर रहा, जहां AQI 179 दर्ज किया गया. यह स्थिति बताती है कि पाकिस्तान के बड़े शहर गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे हैं.

खतरनाक स्तर तक पहुंचा प्रदूषण

मंगलवार को IQAir ने पाकिस्तान के लिए एयर क्वालिटी अलर्ट जारी किया था. कई शहरों में हवा की गुणवत्ता अस्वस्थ से लेकर खतरनाक स्तर तक पहुंच गई. लोगों को घरों में रहने, खिड़कियां बंद रखने, मास्क पहनने और एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई. सर्दियों में ठंडी हवा और स्थिर मौसम प्रदूषक कणों को जमीन के पास रोक लेता है.

स्मॉग से ठप होती सामान्य जिंदगी

तेज स्मॉग के कारण स्कूल बंद करने पड़ते हैं, अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है और सांस संबंधी बीमारियां आम हो गई हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक उद्योगों से निकलने वाला धुआं, वाहनों का उत्सर्जन, फसल अवशेष जलाना और ईंट भट्ठे प्रदूषण के बड़े कारण हैं. हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में दृश्यता भी बेहद कम हो जाती है.

सरकारी कदम और उनकी सीमाएं

सरकार ने ईंट भट्ठों के संचालन में बदलाव, ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर जुर्माना और किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रोत्साहन जैसी पहल की है. इसके बावजूद प्रदूषण पर काबू नहीं पाया जा सका है. विश्व बैंक के अनुसार, 2019 में वायु प्रदूषण के कारण पाकिस्तान में करीब 2.30 लाख लोगों की समय से पहले मौत या गंभीर बीमारी हुई.

नागरिकों की पहल से बदली तस्वीर

सरकारी आंकड़ों की कमी से निराश इंजीनियर आबिद उमर ने पाकिस्तान एयर क्वालिटी इनिशिएटिव की शुरुआत की. 2016 में पहला मॉनिटर लगाने के बाद आज देशभर में करीब 150 मॉनिटर काम कर रहे हैं. इनके आंकड़े IQAir जैसे प्लेटफॉर्म तक पहुंचते हैं. इस पहल ने 2017 में लाहौर हाईकोर्ट को स्मॉग को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा मानने के लिए प्रेरित किया.