विदेश मंत्री एस जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में बदलती वैश्विक व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी पसंद से खुद को एक अधिक अकेली शक्ति बना लिया है. जयशंकर के मुताबिक, अमेरिका की नीतियों में आया बड़ा बदलाव और चीन का लगातार बढ़ता प्रभाव दुनिया के राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों को तेजी से बदल रहा है.
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य की सबसे बड़ी विशेषताओं में अमेरिका का तेजी से बदलता रुख शामिल है. उन्होंने इसे अमेरिका की ओर से चुना गया रास्ता बताते हुए कहा कि वॉशिंगटन अब पहले की तुलना में ज्यादा अकेले रहने की स्थिति में पहुंच गया है. इसके साथ ही चीन का उभार भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रभावित करने वाला दूसरा बड़ा कारक बन गया है.
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— ANI Digital (@ani_digital) October 4, 2026
जयशंकर ने चीन की आर्थिक ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में चीन की हिस्सेदारी करीब एक तिहाई है. उनकी आर्थिक क्षमता अब राजनीतिक प्रभाव में भी बदल रही है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा काफी तेज हो चुकी है और इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है.
विदेश मंत्री ने कहा कि आज देश अपने पास मौजूद आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक ताकत को एक तरह के प्रभाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के साथ दुनिया में देशों की आपसी निर्भरता भी बनी हुई है.
जयशंकर ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं और मिडिल पावर देश अब अपने हितों को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं. ये देश आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ अपनी साझेदारियों में विविधता ला रहे हैं. भारत में प्रचलित 'आत्मनिर्भर' शब्द का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई देश अब अपनी क्षमताओं और हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि देश अब केवल एक ही साझेदार पर निर्भर रहने के बजाय जोखिम कम करने और अलग-अलग देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं. इसे उन्होंने 'डी-रिस्किंग', 'डायवर्सिफिकेशन' और 'हेजिंग' जैसे तरीकों से जोड़ा.
जयशंकर के मुताबिक अब देशों के बीच सहयोग के लिए हर मुद्दे पर पूरी तरह एक जैसी राय होना जरूरी नहीं है. यदि दो या अधिक देशों के हितों में पर्याप्त समानता है, तो वे किसी खास एजेंडे पर साथ काम कर सकते हैं. उन्होंने क्वाड और ब्रिक्स जैसे समूहों का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग देश अपने हितों के अनुसार सहयोग के नए रास्ते बना रहे हैं. कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और नॉर्दर्न सी रूट जैसे प्रयास भी इसी बदलती सोच का हिस्सा हैं.
जयशंकर ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी भारत की पहलों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि दुनिया में अब देश अपने हितों के मुताबिक काम करने की व्यवस्था, संगठन और सहयोग के नए तरीके विकसित कर रहे हैं. उनके मुताबिक, यही प्रक्रिया धीरे-धीरे एक नई और अधिक लचीली वैश्विक व्यवस्था को आकार दे रही है.