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आसाराम के 13 साल पुराने रेप केस में बड़ा मोड़, आखिरकार जोधपुर जेल में किया सरेंडर

अंतरिम जमानत रद्द होने के बाद आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर किया. चलिए जानते हैं कोर्ट ने फैसले में पीड़िता की पीड़ा और धार्मिक आस्था के दुरुपयोग पर क्या टिप्पणियां कीं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
आसाराम के 13 साल पुराने रेप केस में बड़ा मोड़, आखिरकार जोधपुर जेल में किया सरेंडर
Courtesy: Pinterest

जोधपुर: खुद को भगवान बताने वाले आसाराम ने गुरुवार शाम को जोधपुर सेंट्रल जेल में अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया. यह घटना राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा 2013 के नाबालिग से रेप के मामले में उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी अंतरिम जमानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद हुई.

उनके आने की खबर सुनकर दिन की शुरुआत में ही जोधपुर एयरपोर्ट पर उनके समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई थी. उन्होंने अपने वाहन के अंदर से ही अपने अनुयायियों का अभिवादन किया और उन्हें आशीर्वाद दिया, जिसके बाद वे पाल गांव स्थित अपने आश्रम के लिए रवाना हो गए.

कब किया सरेंडर?

जोधपुर स्थित स्थानीय आश्रम में कुछ समय बिताने के बाद वे मेडिकल जांच के लिए AIIMS गए और बाद में शाम को उन्होंने सरेंडर कर दिया. हाई कोर्ट की जोधपुर बेंच ने बुधवार को आसाराम की अपील खारिज कर दी और उनकी अंतरिम जमानत रद्द कर दी, जिसे 7 जुलाई तक बढ़ाया गया था.

आसाराम के वकील ने क्या बताया?

फैसला सुनाए जाने के समय आसाराम जो अक्टूबर से जमानत पर बाहर थे. उत्तराखंड के हरिद्वार में रह रहे थे. उनके वकील ने बताया कि वे कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं और उसी के अनुसार हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की दिशा में आगे बढ़ेंगे.

कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने इस सनसनीखेज मामले में एक विस्तृत फैसला सुनाते हुए, ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा. आदेश सुनाते समय, बेंच ने पीड़िता पर इस अपराध के पड़े प्रभाव को लेकर कड़ी टिप्पणियां कीं.

पीड़िता की जन्मतिथि का जिक्र करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि उसका जन्म 4 जुलाई को हुआ था. जिस दिन अमेरिका में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है और यह तारीख स्वतंत्रता, गरिमा और आत्म-सम्मान का प्रतीक है. बेंच ने टिप्पणी की कि 15 अगस्त 2013 की रात को जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था. जोधपुर में एक झोपड़ी के भीतर उस लड़की की स्वतंत्रता, गरिमा और मासूमियत को एक ऐसे व्यक्ति द्वारा छीन लिया गया, जिसे वह भगवान मानती थी.