मिडल ईस्ट में शांति की उम्मीदें एक बार फिर धुंधली पड़ती दिख रही हैं. लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लागू सीजफायर के बावजूद दोनों तरफ से बारूदी खेल फिर शुरू हो गया है. इजरायल ने हिजबुल्लाह पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाते हुए लेबनान में उसके ठिकानों पर भीषण बमबारी की है. इस ताजा तनाव ने न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, बल्कि इसका सीधा असर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम कूटनीतिक बातचीत पर भी पड़ सकता है.
अमेरिका की मध्यस्थता में 16 अप्रैल 2026 को इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर पर सहमति बनी थी, जिसे बाद में तीन हफ्ते के लिए बढ़ा दिया गया था. चंद दिनों में ही यह समझौता बेअसर साबित हुआ. इजरायल का दावा है कि हिजबुल्लाह ने इस शांति समझौते का उल्लंघन करते हुए इजरायली सीमा पर रॉकेट और ड्रोन दागे हैं.
इसके जवाब में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी सेना को आक्रामक कार्रवाई का आदेश दिया. IDF ने दक्षिणी लेबनान के बिंत ज्बील, बेका घाटी और अन्य प्रमुख इलाकों में हिजबुल्लाह के ठिकानों और रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया है, जिसमें कई लड़ाकों के मारे जाने की खबर है.
इजरायल का स्पष्ट तर्क है कि जब तक हिजबुल्लाह अपनी सैन्य क्षमता को नष्ट नहीं करता और इजरायली सीमा से दूर नहीं जाता, तब तक आत्मरक्षा में हमले जारी रहेंगे. नेतन्याहू सरकार का मानना है कि हिजबुल्लाह को पूरी तरह कमजोर किए बिना इजरायल के नागरिक सुरक्षित नहीं रह सकते.
दूसरी तरफ, ईरान समर्थित हिजबुल्लाह का आरोप है कि इजरायल सीजफायर की आड़ में लेबनान की जमीन पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाहता है. हिजबुल्लाह ने इन हमलों को एकतरफा आक्रामकता करार देते हुए इसका कड़ा बदला लेने की चेतावनी दी है.
इस छद्म युद्ध का सबसे बड़ा वैश्विक असर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर पड़ सकता है. अमेरिका इस वक्त ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ी डील की कोशिशों में जुटा है.