पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है और दूसरे चरण की वोटिंग से पहले सियासी पारा और चढ़ गया है. साउथ बंगाल के वे इलाके, जो अब तक तृणमूल कांग्रेस का मजबूत किला माने जाते रहे हैं, इस बार सबसे बड़ी लड़ाई का मैदान बन गए हैं. यही वजह है कि सभी की नजरें इन सीटों पर टिक गई हैं, क्योंकि यहीं से बंगाल की सत्ता की दिशा तय होती है.
उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा-ये चार जिले बंगाल की राजनीति का केंद्र माने जाते हैं. इन जिलों में बड़ी आबादी के साथ-साथ 90 से ज्यादा विधानसभा सीटों का ऐसा क्लस्टर है, जो किसी भी पार्टी को सत्ता के करीब पहुंचा सकता है. इसलिए इन्हें बंगाल की सत्ता का “एंट्री गेट” कहा जाता है। जो पार्टी यहां जीतती है, उसके लिए सरकार बनाना आसान हो जाता है.
इन चार जिलों को ममता बनर्जी की राजनीति की रीढ़ माना जाता है. यहां के वोटर्स लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के साथ खड़े रहे हैं. खासकर लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री और स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाओं का सीधा असर इन इलाकों में देखने को मिला है. शहरी और ग्रामीण दोनों वर्गों में इन योजनाओं ने ममता के लिए मजबूत भरोसा तैयार किया है. यही वजह है कि यह इलाका TMC का सबसे बड़ा वोट बैंक बना हुआ है.
अगर 2021 विधानसभा चुनाव की बात करें तो इन इलाकों में TMC ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था. 142 सीटों में से 123 सीटें जीतकर उसने अपना दबदबा कायम रखा था, जबकि BJP को सिर्फ 18 सीटों से संतोष करना पड़ा था. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP ने अपनी स्थिति कुछ मजबूत की और कई सीटों पर बढ़त बनाई. इससे साफ है कि मुकाबला अब पहले जैसा एकतरफा नहीं रहा.
इस बार BJP ने खासतौर पर उत्तर 24 परगना पर फोकस किया है. यहां मतुआ और शरणार्थी वोटर्स को साधने की कोशिश तेज कर दी गई है. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को बड़ा मुद्दा बनाकर BJP इन वोटर्स को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व भी इस इलाके में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं.
मतुआ समुदाय, जो मूल रूप से बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों का समूह है, इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है. उनकी सबसे बड़ी मांग नागरिकता और पहचान रही है। BJP इसी मुद्दे को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है, जबकि TMC भी इस वर्ग को अपने साथ बनाए रखने के लिए सक्रिय है. यही वजह है कि यह वोट बैंक अब किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रहा है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर भी सियासत गरमा गई है. मतुआ समुदाय के कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटने की खबरों ने नाराजगी बढ़ा दी है. इससे राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका असर मतदान पर कितना पड़ता है.
कुल मिलाकर बंगाल चुनाव 2026 का दूसरा चरण पूरी तरह से साउथ बंगाल के इन चार जिलों पर टिका हुआ है. एक तरफ ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ है, तो दूसरी तरफ BJP की आक्रामक रणनीति. अब सवाल यही है कि क्या TMC अपना किला बचा पाएगी या BJP इस बार इतिहास रचते हुए यहां सेंध लगाने में कामयाब होगी. यही मुकाबला बंगाल की सत्ता का असली फैसला करेगा.