वैश्विक तेल बाजार से मंगलवार को एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. संयुक्त अरब अमीरात ने ऐलान किया है कि वह 1 मई से दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC से पूरी तरह बाहर हो जाएगा. 1967 से इस शक्तिशाली कार्टेल का हिस्सा रहे UAE का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय तेल कूटनीति के लिए एक बड़े भूकंप जैसा है.
UAE ने यह कड़ा और ऐतिहासिक कदम ऐसे समय उठाया है, जब वह लगातार अपने ही साथी OPEC सदस्य देश ईरान की आक्रामकता का सामना कर रहा है. बीते कई हफ्तों से ईरान द्वारा UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, तेहरान ने दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर दी है. इसके चलते UAE का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसने सीधे तौर पर उसकी अर्थव्यवस्था की नींव को ही खतरे में डाल दिया था.
यह फैसला OPEC के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. इसी साल फरवरी के आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब और इराक के बाद UAE इस संगठन का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश था. इतने बड़े और साधन-संपन्न देश का अचानक कार्टेल से बाहर होना OPEC की ताकत और तेल की कीमतें तय करने के उसके एकाधिकार को काफी हद तक कमजोर कर देगा.
इस बड़े फैसले पर UAE के ऊर्जा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी किया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया, "यह फैसला देश की उत्पादन नीति, मौजूदा और भविष्य की क्षमता की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है. यह कदम पूरी तरह से हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और बाजार की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया है."