नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया में शरण मांगने वाली ईरान की महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को उस समय अपने सुरक्षित ठिकाने से हटाना पड़ा जब टीम की एक सदस्य ने अपना फैसला बदलते हुए उनका लोकेशन ईरानी दूतावास को बता दिया. इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी खिलाड़ियों को दूसरे सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया.
जानकारी के अनुसार ईरान की महिला फुटबॉल टीम के सात सदस्य ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे और उन्होंने वहां शरण की मांग की थी. इन खिलाड़ियों को अपने देश में ‘गद्दार’ कहा गया था क्योंकि उन्होंने एक मैच के दौरान ईरान का राष्ट्रीय गान गाने से इनकार कर दिया था. इसके बाद उनके भविष्य और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी.
ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने बताया कि खिलाड़ियों को एक सुरक्षित घर में रखा गया था ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके लेकिन टीम की एक सदस्य ने बाद में अपना मन बदल लिया और ईरान लौटने का फैसला किया. बताया गया कि उसने अन्य खिलाड़ियों से बातचीत की थी जो पहले ही शरण लेने के बजाय ईरान लौटने का निर्णय कर चुकी थीं.
टोनी बर्क ने कहा कि जैसे ही यह पता चला कि ईरानी दूतावास को उस सुरक्षित स्थान की जानकारी मिल गई है, उन्होंने अधिकारियों को तुरंत खिलाड़ियों को वहां से हटाने का निर्देश दिया. सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया कि जिस खिलाड़ी ने अपना फैसला बदला, वह उसका व्यक्तिगत निर्णय था और उस पर किसी तरह का दबाव नहीं था.
रिपोर्ट्स के मुताबिक टीम के साथ यात्रा कर रहे कुछ पुरुष अधिकारियों को लेकर भी चिंता थी कि वे खिलाड़ियों को शरण लेने से रोकने की कोशिश कर सकते हैं. इसलिए ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने शुरुआत से ही खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी थी.
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सात खिलाड़ियों में से किसने अपना फैसला बदला है. इस बीच एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने जानकारी दी है कि ईरान की बाकी टीम फिलहाल मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के एक होटल में ठहरी हुई है और अपने घर लौटने की अगली यात्रा का इंतजार कर रही है.
एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने कहा है कि टीम के वहां रहने के दौरान उन्हें हर जरूरी सहायता दी जाएगी और उनकी यात्रा की आगे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.