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India Daily

UAE ने OPEC छोडने का किया ऐलान, इसका भारत पर क्या होगा असर? क्या बढ़ जाएंगी तेल की कीमत

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच UAE ने OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने की घोषणा की है. ऐसे में इसका असर भारत और अन्य देशों पर क्या पड़ेगा इसे समझना बेहद जरूरी है.

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Edited By: Shanu Sharma
UAE ने OPEC छोडने का किया ऐलान, इसका भारत पर क्या होगा असर? क्या बढ़ जाएंगी तेल की कीमत
Courtesy: Grok AI

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग दो महीने से प्रभावित है. जिसके कारण तेल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात ने 1 मई से OPEC और OPEC+ से अलग होने का ऐलान कर दिया है. 

OPEC और OPEC+ दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक समूह हैं, जो दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग 40-50 प्रतिशत नियंत्रित करते हैं. जिससे तेल के दाम तय होते हैं. अब इस समूह से UAE के बाहर हो जाने के कारण उत्पादन के स्तर में बदलाव आएगा. जिसका असर अन्य देशों पर देखने को मिल सकता है. 

UAE के फैसले का भारत पर होगा असर

भारत अपने तेल सप्लाई के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है. ऐसे में वैश्विक स्तर पर हो रहा कोई भी बदलाव का सीधा असर देश पर पड़ता है. भारत उन देशों में से एक है जो इससे फायदा उठाने की उम्मीद कर रहा है. खासकर तब जब नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में बनी अनिश्चितता से निपटने के लिए अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है.

UAE के इस कदम के ऊर्जा बाजारों और उन देशों के लिए तत्काल और लॉन्ग टर्म परिणाम होंगे जो अपने देश की जरूरत के तेल और गैसके लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है. ऐसे अमेरिका यूएई के इस फैसले से काफी खुश नजर आ रहा है. कुल मिलाकर जब तेल बाजार में उथल-पुथल आएंगे तो अमेरिका के लिए और भी ज्यादा बाजार खुल जाएगा.

वैश्विक स्तर पर पड़ेगा असर

अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था. जिसके बाद से ईरान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों को निशाना बनयाा. ईरान ने UAE की कई ऊर्जा साइटों पर हमला किया, जिसमें रुवैस रिफाइनरी भी शामिल है. जहां रोजाना 922,000 बैरल कच्चे तेल की प्रोसेसिंग हो सकती है. इस रिफाइनरी के क्षतिग्रस्त होने के कारण यूएई को भारी नुकसान उठाना पड़ा है.  इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण व्यापार भी प्रभावित है.

UAE ने अपने इस फैसले के पीछे का तर्क देते हुए कहा है कि इन समूहों से अलग होने का उसका फैसला, उसकी बदलती हुई ऊर्जा प्रोफाइल और तेल उत्पादन में हो रही बढ़ोतरी को दर्शाता है. हालांकि उसने कहा कि, वह वैश्विक बाज़ारों में अपनी जिम्मेदार और भरोसेमंद भूमिका निभाना जारी रखेगा. इस कदम से फिलहाल तो भारत को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन लॉन्ग टर्म में बाजार में अस्थिरता आ सकती है.