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डायरेक्ट नहीं, अब इंडायरेक्ट टकराव, ईरान-अमेरिका के बीच पाकिस्तान बना सेतु, क्या सख्त शर्तों के बीच निकल पाएगा शांति का रास्ता

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अब उम्मीद की एक किरण इस्लामाबाद से जुड़ी है. ईरान ने अमेरिका से सीधे संवाद से इनकार कर दिया है और पाकिस्तान के जरिए बातचीत का रास्ता चुना है, जिससे हालात और भी जटिल हो गए हैं.

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma
डायरेक्ट नहीं, अब इंडायरेक्ट टकराव, ईरान-अमेरिका के बीच पाकिस्तान बना सेतु, क्या सख्त शर्तों के बीच निकल पाएगा शांति का रास्ता
Courtesy: Credit: OpenAi

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर अहम भूमिका में नजर आ रहा है. इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की कोशिश हो रही है. दुनिया की निगाहें अब इस शहर पर टिक गई हैं. कूटनीतिक हलचल तेज हो चुकी है. हर पक्ष अपने हित साधने में जुटा है. यह मुलाकात सिर्फ बातचीत नहीं, एक बड़ी रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है.

क्या ईरान ने बदला बातचीत का तरीका

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से सीधे बातचीत नहीं करेगा. उसका रुख अब पूरी तरह बदल चुका है. अब बातचीत पाकिस्तान के जरिए ही होगी. यानी यह संवाद अप्रत्यक्ष तरीके से आगे बढ़ेगा. इससे प्रक्रिया और जटिल हो गई है. भरोसे की कमी भी साफ दिख रही है. यही वजह है कि इस बातचीत को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है.

क्या इस्लामाबाद में तेज हुई हलचल

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं. उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की. इसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी चर्चा हुई. कई दौर की बैठकों में अलग-अलग मुद्दों पर बात हो रही है. माहौल पूरी तरह कूटनीतिक गतिविधियों से भरा हुआ है. हर बैठक का अपना महत्व है.

क्या शर्तों ने बढ़ाई बातचीत की मुश्किल

ईरान ने अपनी चिंताएं पाकिस्तान के सामने रखी हैं. उसने अमेरिका की शर्तों पर आपत्ति जताई है. दूसरी ओर अमेरिका भी अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान को यूरेनियम कार्यक्रम पर झुकना होगा. होर्मुज में गतिविधियों पर भी नियंत्रण की मांग की गई है. यही सख्त शर्तें बातचीत को कठिन बना रही हैं.

क्या आमने-सामने बातचीत की संभावना कम

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान पहुंच गया है, लेकिन दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत की संभावना बेहद कम बताई जा रही है. यह पूरी प्रक्रिया परोक्ष तरीके से ही चल सकती है. इससे समझौते तक पहुंचना और मुश्किल हो जाता है. हर संदेश एक तीसरे पक्ष के जरिए जा रहा है. यही कारण है कि प्रक्रिया लंबी और जटिल बन रही है.

क्या अगले 24 घंटे होंगे निर्णायक

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले 24 घंटे बेहद अहम हैं. अगर बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं. अमेरिका पहले ही सख्त चेतावनी दे चुका है. ईरान भी जवाबी तैयारी में नजर आ रहा है. ऐसे में तनाव और बढ़ने की आशंका है. यही वजह है कि हर कदम पर नजर रखी जा रही है.

क्या शांति या टकराव की ओर बढ़ेंगे हालात

इस्लामाबाद की ये बातचीत उम्मीद जरूर जगाती है. लेकिन जमीनी सच्चाई अभी भी चुनौतीपूर्ण है. भरोसे की कमी और सख्त शर्तें रास्ता रोक रही हैं. कूटनीति और रणनीति के बीच संतुलन बनाना मुश्किल है. अब देखना होगा कि यह कोशिश शांति लाती है या टकराव को और तेज कर देती है. यही इस संकट की असली परीक्षा है.