ईरान और अमेरिका के बीच शनिवार को एक नई उम्मीद जगी थी कि बातचीत आगे बढ़ सकती है और पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला था, लेकिन हालात अचानक बदल गए. ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी टीम के बिना ही इस्लामाबाद से रवाना हो गया. इससे बातचीत की पूरी कोशिश अधूरी रह गई.
ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह अमेरिका से सीधे बातचीत करने के पक्ष में नहीं है. वह पाकिस्तान के जरिए अपनी बात पहुंचाना चाहता है और इसी रणनीति के तहत यह बैठक तय की गई थी. लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अनुपस्थिति ने पूरी प्रक्रिया को रोक दिया और कोई ठोस बातचीत नहीं हो सकी.
इस दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की और दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई. इस बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी मौजूद रहे, लेकिन इस मुलाकात के बावजूद कोई बड़ा कूटनीतिक हल सामने नहीं आ सका.
पूरे मामले में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है. अमेरिका चाहता है कि इस रास्ते से तेल की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहे जबकि ईरान इस पर अपनी शर्तें रखना चाहता है. इसी वजह से दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है जो बातचीत में बाधा डाल रही है.
अमेरिका की ओर से खास दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के इस्लामाबाद आने की संभावना जताई गई थी. व्हाइट हाउस की तरफ से भी संकेत दिए गए थे कि बातचीत आगे बढ़ सकती है, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल के जल्दी लौट जाने से यह पूरा कार्यक्रम अधर में लटक गया. अब इस पर कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है.
ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान कोई प्रस्ताव तैयार कर रहा है. उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को अपना समृद्ध यूरेनियम छोड़ना होगा. होर्मुज से तेल की आवाजाही को खुला रखना होगा और फिलहाल यही शर्तें दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी दूरी बनी हुई हैं. आगे का रास्ता अभी भी अनिश्चित नजर आ रहा है.