नई दिल्ली: पूरी दुनिया में बढ़ती उथल-पुथल के बीच 'बाल्कन के नोस्ट्राडेम्स' कही जाने वाली बाबा वांगा की भविष्यवाणियां एक बार फिर वैश्विक चर्चाओं का केंद्र बन गई हैं. साल 2026 को लेकर उन्होंने जो खौफनाक संकेत दिए थे, वे आज के बिगड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के साथ काफी हद तक मेल खाते नजर आ रहे हैं. कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित प्रोफेसर जेफरी सैक्स की हालिया चिंताजनक टिप्पणियों ने इस अंदेशे को और भी मजबूत कर दिया है. ईरान, रूस और चीन जैसे मोर्चों पर सुलगती आग अब मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है.
बाबा वांगा ने अपनी भविष्यवाणियों में साल 2026 को अत्यंत महत्वपूर्ण और खतरनाक समय बताया था. उनका दावा था कि इसी वर्ष इंसानों का सामना पहली बार अलौकिक प्राणियों से होगा, जिससे पूरी दुनिया पर एक नया संकट छा सकता है. साथ ही उन्होंने तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत की भी स्पष्ट चेतावनी दी थी. हालांकि राहत की बात यह है कि उनके अनुसार इस युद्ध से मानवता का पूर्ण विनाश नहीं होगा, क्योंकि उनके कैलेंडर के हिसाब से दुनिया का आधिकारिक अंत साल 5079 में होना तय है.
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने अमेरिका को आग से न खेलने की सख्त सलाह दी है. उनका मानना है कि यदि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की, तो तेहरान का पलटवार इतना तेज और जोरदार होगा कि उसे नियंत्रित करना नामुमकिन हो जाएगा. सैक्स ने चेतावनी दी है कि ईरानी मिसाइलों की जद में पूरा खाड़ी क्षेत्र है. जहां तेल, गैस और पानी के संयंत्र सुरक्षित नहीं हैं. यह क्षेत्रीय संघर्ष देखते ही देखते एक पूर्ण विश्व युद्ध का भयानक रूप ले सकता है.
यूरोप के हालात भी तेजी से बदतर होते जा रहे हैं, क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को 105 अरब डॉलर का एक विशाल कर्ज मंजूर किया है, जिससे राष्ट्रपति जेलेंस्की रूस के खिलाफ और अधिक घातक हथियार खरीदेंगे. इस बीच अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ती दरार ने रूस और यूरोप की सीधी जंग का खतरा बढ़ा दिया है. खासकर तब जब डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो जैसे शक्तिशाली संगठन को छोड़ने की बात कही है.
ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच जारी 'कोल्ड वॉर' अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गया है. अमेरिका ने चीन को अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी बेचने पर नए प्रतिबंध लगाकर बीजिंग की नब्ज दबा दी है. अमेरिकी कांग्रेस का तर्क है कि चीन इन तकनीकों के जरिए वैश्विक शक्ति संतुलन को बिगाड़ना चाहता है. ताइवान सीमा पर चीन की बढ़ती सैन्य हलचल ने संकेत दिया है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें किसी भी पल आमने-सामने आ सकती हैं, जो वैश्विक शांति के लिए घातक होगा.
रूस-यूक्रेन की कभी न खत्म होने वाली जंग और चीन-अमेरिका की बढ़ती दुश्मनी को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि दुनिया सचमुच तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है. हालांकि बाबा वांगा का कहना था कि यह युद्ध मानवता का आखिरी अध्याय नहीं होगा. लेकिन जेफरी सैक्स जैसे अनुभवी अर्थशास्त्री की चेतावनी को नजरअंदाज करना आत्मघाती हो सकता है. वर्तमान में पूरी दुनिया की निगाहें उन शक्तिशाली देशों पर टिकी हैं. जो इस खतरनाक वैश्विक बिसात के मुख्य खिलाड़ी बने हुए हैं.