मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध अब एक बेहद खतरनाक और अप्रत्याशित मोड़ पर पहुंच गया है. ईरान की एलीट मिलिट्री यूनिट, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने मंगलवार को खुलेआम चेतावनी दी है कि वह 1 अप्रैल से पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद प्रमुख अमेरिकी कंपनियों को सीधे तौर पर निशाना बनाएगी. यह गंभीर धमकी शीर्ष ईरानी कमांडरों की लगातार हो रही टारगेटेड हत्याओं के जवाब में दी गई है.
ईरान की इस खौफनाक 'हिट लिस्ट' में 18 बड़ी अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं. इनमें मुख्य रूप से Microsoft, Google, Apple, Intel, IBM, Tesla, Boeing, Meta (Facebook, WhatsApp, Instagram), Oracle, Cisco, HP, Dell, General Electric और JPMorgan Chase के नाम हैं. गौरतलब है कि इनमें से कई कंपनियों के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई और अबू धाबी में बड़े कॉर्पोरेट और रिटेल ऑफिस मौजूद हैं.
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है, "इन कंपनियों को ईरान में होने वाले हर आतंकी हमले के बदले अपनी-अपनी यूनिट्स की तबाही की उम्मीद करनी चाहिए. ईरान ने इसके लिए एक सख्त समय सीमा भी तय कर दी है. यह संभावित कार्रवाई बुधवार, 1 अप्रैल को तेहरान के समयानुसार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार रात 10:30 बजे) से शुरू होगी. IRGC ने इन संस्थानों के कर्मचारियों को अपनी जान बचाने के लिए तुरंत कार्यस्थल छोड़ने की चेतावनी दी है.
IRGC का आरोप है कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी ये टेक दिग्गज कंपनियां अमेरिकी और इजरायली सेना के साथ मिलकर काम कर रही हैं. ईरान का दावा है कि बिना पायलट वाले ड्रोन को निर्देशित करने, टारगेट चुनने और ईरान के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन्स की योजना बनाने में इन AI कंपनियों की तकनीक का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है.
इस कड़ी धमकी से ठीक पहले IRGC ने एक अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में अपने शीर्ष अधिकारी, ब्रिगेडियर जनरल जमशेद एशाघी की मौत की पुष्टि की थी. एशाघी ईरान के सशस्त्र बलों में बजट और वित्तीय मामलों के प्रमुख थे. उन पर चीन को तेल बेचकर लेबनान में हिजबुल्लाह, गाजा में हमास और यमन में हूती विद्रोहियों को फंडिंग करने का आरोप था, जिसके चलते 2025 में अमेरिका ने उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे.