पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका को अपने यूरोपीय सहयोगियों से मदद की उम्मीद थी, लेकिन एक के बाद एक देश उससे दूरी बना रहे हैं. स्पेन और फ्रांस द्वारा हवाई क्षेत्र बंद करने के बाद अब इटली ने भी अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने एयर बेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने ऑपरेशन को आगे बढ़ाने के लिए यूरोपीय बेसों पर निर्भर है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है.
सूत्रों ने पुष्टि की कि इटली ने अमेरिकी सैन्य विमानों को सिसिली के सिगोनेला एयर बेस पर उतरने की अनुमति नहीं दी. यह जानकारी इटैलियन अखबार कोरिएरे डेला सेरा की रिपोर्ट के बाद सामने आई, जिसमें कहा गया था कि कुछ अमेरिकी बॉम्बर विमानों को मध्य-पूर्व रवाना होने से पहले इटली में रुकना था. हालांकि, उन्हें अनुमति नहीं मिली. रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि कितने विमान शामिल थे और यह इनकार कब किया गया.
अखबार के अनुसार, इटली ने अनुमति इसलिए नहीं दी क्योंकि अमेरिका ने इसके लिए कोई औपचारिक अनुरोध प्रस्तुत नहीं किया था. सैन्य नेतृत्व से परामर्श नहीं किया गया, जबकि दोनों देशों के बीच मौजूद सैन्य समझौतों के अनुसार यह जरूरी है. इन प्रोटोकॉल का पालन न होने के कारण इटली ने उतरने की अनुमति रोक दी. इटली के रक्षा मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, जिससे मामले में सस्पेंस बरकरार है.
कुछ दिनों पहले स्पेन ने ईरान युद्ध में शामिल अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था. इसके बाद फ्रांस ने भी एयरस्पेस उपयोग की अनुमति से इनकार कर दिया. अब इटली के फैसले ने अमेरिकी रणनीति को और मुश्किल बना दिया है. इन घटनाओं ने दिखाया है कि यूरोपीय देश अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में सीधे शामिल होने से बच रहे हैं और अपनी कूटनीतिक दूरी बनाए रखना चाहते हैं.
इटली में वामपंथी दलों ने सरकार से मांग की है कि वह अमेरिका को अपने ठिकानों का उपयोग करने से रोके और किसी भी संघर्ष में शामिल न हो. प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की सरकार ने कहा है कि यदि अमेरिका औपचारिक अनुरोध करता है, तो संसद से मंजूरी ली जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में बढ़ती असहमति अमेरिका की मध्य-पूर्व रणनीति को प्रभावित कर सकती है और आने वाले दिनों में यह तनाव और बढ़ सकता है.